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Thursday, October 29, 2020

What is Share Buyback

 शेयर बायबैक (Buyback) के पीछे कंपनी का उद्देश्य


आप स्टॉक मार्केट मे निवेश करते होगे तो आपने भी सुना होगा की कोई ना कोई कंपनी अपने शेयर बायबैक कर रही है, तो आप भी सोच रहे होगे की बायबैक होता क्या है?, कंपनी क्यू बायबैक करती है। तो आज हम देखते है आपके सवालो के जवाब।

हम देखते है की, शेयर बाजार के हर एक कंपनी मे बहुत सारे निवेशक होते है। जैसे प्रमोटर्स, घरेलू संस्थागत निवेशक, विदेशी निवेशक, म्युच्युअल फंड तथा आम निवेशक। इन सब मे कंपनी के भाग (share) विभाजित होते है। इसे ही हम भागधारक (share holder) कहते है।

यह पढे:- Secret of success in stock market


तो देखते है शेयर buyback होता क्या है?

शाब्दिक अर्थ देखे तो ऐसा प्रतीत होता है की, कंपनी अपने ही शेयर का कुछ अनुपात पुनः खरीदनेके लिये इच्छूक है। यानी जब कंपनी अपने शेयर अपने ही निवेशकों से पुनः खरीदी करती है उसे हम बाय बैक कहते हैं। किसी कंपनी के पास कॅश रिसर्व ज्यादा, अतिरिक्त है तो कंपनी अपने भागधारक को कह सकते है की हम शेयर बायबैक कर रहे है, इसके लिये ज्यादातर कंपनी एक निश्चित शेयर का मूल्य तय करती है। वो मूल्य वर्तमान मूल्य से लगभग ज्यादा ही रहता है; उस मूल्य पर जिन्ह निवेशक को शेयर बेचना है वह बेच सकता है, इस एक स्थिती मे कंपनी शेयर खरीद लेगी।

दुसरा जब भी कंपनी को बायबैक करना है, तब वह बाजार किंमत पर खरीद सकता है। कंपनी के जो शेयर होते है वह या तो कंपनी खरीदती है या उनके प्रबंधक, प्रवर्तक खरीदते हैं 

"बायबैक की प्रक्रिया"


जब भी किसी कंपनी को अपने शेयर खरीदने का प्रस्ताव लाना होता है तो उस प्रस्ताव को कंपनी के बोर्ड के सामने रखना पड़ता है। बोर्ड के मंजूरी के बाद कंपनी बाय बैक की योजना तैयार करती है। एक निश्चित राशि और तिथि में बायबैक का कार्यक्रम निश्चित होता है। जिन निवेशकों के पास उस स्थिति तक शेयर होते हैं वह बायबैक में आवेदन कर सकते हैं।


"टाटा कंसल्टेंसी शेयर बायबैक"

टीसीएस ने अपने बोर्ड मीटिंग दिनांक 7 अक्टूबर 2020 को 16000 करोड़ रुपए का बायबैक घोषित किया है।

TCS प्रति शेयर ₹3000 के भाव पर 53 करोड़ शेयर की खरीदारी कर रहा है

Offer details

Offer size:- 16000 crore₹

Offer price:- 3000₹/share

CMP:- 2673₹/Share

Premium:- 327₹/share

TCS मे वर्तमान निवेशक बायबैक के लिये आवेदन कर प्रति शेयर 327₹ मुनाफा अर्जित कर सकते है।


"शेयर बायबैक के पीछे कंपनी का उद्देश्य" 

सकारात्मक:- 

जब किसी नकारात्मक खबरों के कारण तथा वैश्विक मंदी के समय में किसी कंपनी के शेयर के प्राइस में बहुत उतार आता है, तब वह शेयर का प्राइस अंडरवैल्यूड होता है। लेकिन कंपनी के फंडामेंटल अच्छे रहते हैं उस वजह से कंपनी बाय बैक लाता है।


नकारात्मक पहलू

 हो सकता है कंपनी के पास कैश रिजर्व ज्यादा हो और कंपनी के पास वर्तमान में इन्वेस्टमेंट के लिए कोई मार्ग उपलब्ध नहीं, उस स्तिथी में भी कंपनी बाय बैक ला सकती है।


"शेयर पर बाय बैक का असर" 

जिस दिन कंपनी बायबैक घोषित करती है तब शेयर में उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है। बायबैक की वजह से कंपनी के प्रति शेयर आय में वृद्धि होती है क्योंकि ट्रेडिंग के लिए उपलब्ध शेयर की संख्या में कमी आती है।

इस प्रकार कंपनी अपने शेयर पुनः खरीदने के लिये बायबैक लाती है। और निवेशक बायबैक मे अपने शेयर बेचकर मुनाफा अर्जित कर सकता है।

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Stock market term ✓ IPO

What is stock market

Demat account

Friday, October 23, 2020

National Pension Scheme (NPS)

 " राष्ट्रीय पेंशन योजना "



सरकार अपने नागरिकों के लिए नई-नई बचत योजना, निवेश योजना लाती है, जिससे नागरिकों को लाभ हो और भविष्य में आर्थिक सुरक्षा प्राप्त हो। उसमे ही एक योजना National Pension System अर्थात राष्ट्रीय पेन्शन योजना भारत सरकार द्वारा स्थापित एक पेन्शन योजना है। जो मासिक बचत द्वारा लोगो को सेवानिवृत्ती के बाद वृध्दावस्था मे पेन्शन द्वारा सुरक्षा प्रदान करती है।

1 जनवरी 2004 के पहले सरकारी कर्मचारी को सरकार खुदसे पेन्शन देती थी। लेकीन 1 जनवरी 2004 के बाद सरकार ने पुराणी पेन्शन योजना बंद करके राष्ट्रीय पेन्शन योजना लाई। और सभी सरकारी कर्मचारीयोको यह बंधनकारक कर दी। ओर 2009 के बाद इस योजना को प्राइवेट सेक्टर के लिए भी खुला कर दिया गया।

 राष्ट्रीय पेंशन योजना को पीएफआरडीए रेग्युलेट करता है।

एनपीएस कौन ले सकता है।

- कोई भी भारतीय नागरिक जिसकी उम्र 18 से 65 साल के बीच हो वह एनपीएस में अपना खाता चालू करा सकता है। इसमें अनिवासी भारतीय भी खाता चालू कर सकता है।

"एनपीएस लाने का उद्देश"


केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय पेंशन योजना मुख्यता सरकारी कर्मचारियों की पेंशन की देयता दूर करने के लिये लायी गयी है। और सभी सरकारी, गैर सरकारी कर्मचारी तथा लोगो को पेन्शन और निवेश का विकल्प एक साथ उपलब्ध करणे के लिये इसे चालू कराया गया है। इस योजना द्वारा अभी सरकार की देयता सीमित हो गयी है।

1 जनवरी 2014 के बाद सभी केंद्रीय कर्मचारी वर्ग (सशस्त्र बल के अलावा) के लिये अनिवार्य कर दिया है।

इस योजना मे केन्द्र सरकार कर्मचारी वर्ग के पेन्शन हेतू मासिक अंशदान करती है। मुल वेतन+ महंगाई भत्ते के 10% सरकार NPS मे जमा करती है। अभी वर्तमान मे सरकार का अंशदान 14% है।


राज्य सरकार द्वारा राष्ट्रीय पेन्शन योजना लागू करना।

- वर्तमान मे कुछ राज्यो ने राष्ट्रीय पेन्शन योजना (NPS) को अपनाया है तो कुछ ने नही। आज भी कुछ राज्य पुरानी पेन्शन दे रहे है।


"राष्ट्रीय पेंशन योजना कैसे कार्य करती है"

एनपीएस का एक ट्रस्ट है, उसे पीएफआरडीए रेग्युलेट करता है। राष्ट्रीय पेन्शन योजना मे एक व्यक्ती एक ही खाता खोल सकता है। इसमे दो प्रकार के अकाउंट है। एक टायर- 1 और दुसरा टायर-2

Tier-1 अकाउंट मुख्यता पेन्शन के लिये है। Tier-2 अकाउंट इन्व्हेस्टमेंट के लिये है। 

जो एनपीएस धारक होते हैं उनके पैसों को पेंशन फंड मैनेजर निवेश करते हैं। सरकारी कर्मचारियों का जो पैसा होता है वह एसबीआई, यूटीआई और एलआईसी में इन्वेस्ट किया जाता है।

जो व्यक्ति राज्य या केंद्र सरकार का कर्मचारी नहीं है वह व्यक्ति भी इसमें अकाउंट खोल सकता है। मात्र ₹500 से हम वह चालू कर सकते हैं। और साल का कम से कम ₹1000 जमा करना होगा।

जिस व्यक्ति के पास टायर वन अकाउंट होता है वहीं इस टायर 2 अकाउंट को चालू करा सकता है। इसमें व्यक्ति कभी भी पैसा डाल सकता है निकाल सकता है, लेकिन इस पर कर छूट नहीं मिलती। आप इसमें ₹1000 के साथ अकाउंट खोल सकते हैं और हर एक अंशदान 250 रुपए का होना चाहिए।

कोई भी सरकारी कर्मचारी जो tier -I मे निवेश करता है वह खुद के निवेश की 25℅ राशी पुरे टर्म मे 3 बार कभी भी निकाल सकता है। जब 60 साल बाद कार्यकाल समाप्त होता है तब 60% राशी हमे मिलती है। और बाकी 40% राशी पेन्शन फंड मे हस्तांतरित होती है।


"कर लाभ"

एनपीएस मे किया गया निवेश आयकर अधिनियम के अंतर्गत 80C द्वारा 1.50 लाख ₹ टॅक्स छुट देता है। और अधिनियम के 80CCD (1B) के अनुसार 50000₹ अतिरिक्त कर लाभ होता है।

Read :- public provident fund




Wednesday, October 21, 2020

Public Provident Fund (PPF Account)

" पब्लिक प्रोविडेंट फंड (पीपीएफ)"


 बहुत से लोग अपने मासिक बचत में से कुछ राशि विविध माध्यम में निवेश करते हैं। ताकि भविष्य में उन्हें उसका लाभ प्राप्त हो। वर्तमान में निवेश के कई विकल्प हमारे पास उपलब्ध है, जैसे बैंक मे फिक्स डिपाजिट, पोस्ट ऑफिस में फिक्स डिपॉजिट, शेयर मार्केट में निवेश, म्यूचुअल फंड में निवेश, राष्ट्रीय बचत प्रमाण पत्र, National Pension Scheme, जीवन बिमा (LIC), उसी तरह PPF यानी पब्लिक प्रोविडेंट फंड यह एक बिना जोखिम वाला निवेश का विकल्प है।

सार्वजनिक भविष्य निधी योजना केंद्र सरकार द्वारा स्थापित है। किसी भी व्यक्ती को दीर्घ अवधी के लिये निवेश करना हो तो वो व्यक्ती इसमे निवेश कर सकता है। कोई भी व्यक्ती राष्ट्रीयकृत बँक तथा निजी बँक मे सार्वजनिक भविष्य निधी खाता (PPF) चालू करा सकता है! या कोई पोस्ट ऑफिस मे भी खाता चालू कर सकता है। 


" पब्लिक प्रोविडेंट फंड (पीपीएफ) संबधी महत्वपूर्ण बिंदू"

1) मात्र ₹500 वार्षिक राशि से हम सार्वजनिक भविष्य निधि खाता चालू कर सकते हैं। 

2) आकर्षक ब्याज दर- वर्तमान में 7.1% वार्षिक ब्याज दर दिया जाता है। भारत सरकार का वित्त मंत्रालय हर 3 माह बाद यानी त्रैमासिक तौर पर ब्याज दर निश्चित करती है।

3) पीपीएफ में 15 साल का लॉकिंग पीरियड होता है, अर्थात हम उसमें राशि 15 साल के बाद निकाल सकते हैं। लेकिन हम समय से पहले भी भविष्य निधि खाता बंद करा सकते हैं। इसके लिए हमें 5 साल पूरे होना चाहिए, आरोग्य चिकित्सा उपचार के लिए तथा पीपीएफ अकाउंट होल्डर के उच्च शिक्षण के लिए हम इसे समय से पहले बंद करा सकते हैं।

4) पब्लिक प्रोविडेंट फंड में हमें लोन की सुविधा भी उपलब्ध है। 3 साल के बाद 6 साल तक हम इसमें लोन ले सकते हैं, और इस पर ब्याज दर जो पीपीएफ पर ब्याज दर होती है उसके 1% होती है।

5) सार्वजनिक भविष्य निधि में हम जो वार्षिक राशि जमा करते हैं वह आयकर अधिनियम 80क के अंतर्गत टैक्स फ्री होता है। सालाना 1.5 लाख रुपए तक इसमें टैक्स फ्री होता है।

6) 15 साल बाद जब पब्लिक प्रोविडेंट फंड खाता परिपक्व हो जायेगा उस समय हम अकाउंट बंद करा सकते है या फिर और 5 साल  के लिये आगे बढा सकते है। 


"पीपीएफ के फायदे"


1) शून्य जोखीम निवेश है।

2) PPF पर 15 साल के बाद जो ब्याज प्राप्त होता है उस पर कोई टॅक्स नही लगता।

3) हम जो 1.5 लाख रुपए तक वार्षिक जमा करते है सार्वजनिक भविष्य निधी मे उसपर आयकर अधिनियम के अंतर्गत कर छुट मिलती है।

4) 15 साल पुरे होने के बाद भी ppf अकाउंट हर बार 5-5 साल के लिये आगे नियमित रख सकते है।

5) पब्लिक प्रोविडेंट खाता एक बैंक के ब्रांच से दूसरे ब्रांच में तथा एक बैंक से दूसरे बैंक में स्थानांतर कर सकते हैं!


"पीपीएफ अकाउंट से जुडे कुछ सवाल"


1) एक व्यक्ती कितने अकाउंट चालू कर सकता है?

- एक व्यक्ती अपने नाम पर मात्र एक ही अकाउंट चालू कर सकता है।

हम अलग अलग बँक मे अलग अलग PPF अकाउंट नही चालू कर सकते।

हा आप अपने नाबालिक बच्चो के नाम पर पीपीएफ अकाउंट चालू कर सकते हैं !


2) क्या कोई भी व्यक्ति पीपीएफ खाता खोल सकता है?

अनिवासी भारतीय इसमें खाता खोल नहीं सकता सिर्फ भारतीय व्यक्ति खाता खोल सकता है!


3) पीपीएफ खाते में न्यूनतम और अधिकतम कितनी राशि जमा कर सकते हैं?

- न्यूनतम ₹500 और अधिकतम ₹150000 वार्षिक राशि जमा कर सकते हैं!


4) पीपीएफ अकाउंट के लिए कौन से दस्तावेज आवश्यक है?

-  पासपोर्ट साइज फोटो पहचान प्रमाण पत्र निवासी प्रमाण पत्र और नामांकन फॉर्म

पीपीएफ अकाउंट ऑनलाइन भी चालू कर सकते हैं! एसबीआई में ऑनलाइन अकाउंट ओपन करने के बाद उसकी प्रिंट आउट ब्रांच में जमा करना होता है!


5) पीपीएफ पर ऋण सुविधा किस प्रकार है?

पीपीएफ खाता धारक अपने खाते में उपलब्ध पीपीएफ शेष राशि का 25 प्रतिशत तक का ऋण ले सकता है।

 "Reading list"

Tuesday, October 20, 2020

Osmostech Business plan

 "One time investment- life time profit"



आज हम OSMOSTECH के बारे में जानकारी लेगे! यह कैसे कार्य करता है, किस तरह से इसमें पैसे कमाए जा सकते हैं!

नेटवर्क मार्केटिंग में पिछले साल से कार्यरत कुछ नए आईडिया के साथ OSMOSTECH ने पदार्पण किया है! यह महाराष्ट्र के पूना में स्थित कंपनी है! Osmostech के पास अपना खुद का एक सोशल साइट app है तथा एक शॉपिंग app है उस माध्यम से कंपनी revenue प्राप्त करती है।



"प्रतिदिन ₹20 से ₹1000 तक कैसे प्राप्त करें"


Osmos फ्री में जॉइनिंग देती है लेकिन प्रतिदिन कम से कम ₹20-100₹ प्रतिदिन कमाने के लिए हमें 1200 रुपए का प्रीमियम प्लान लेना होता है, और यही एकमात्र 1200 रुपए भर के हम अपनी आईडी ले सकते हैं उसमें भी कंपनी 1200 रुपए का शॉपिंग वाउचर कूपन देती है जो 400 के तीन होते हैं।


Id Activation- 1200 ₹

Registration and activation is auto renewal after every 4 months,

Renewal charges 1200 ₹ which debit from osmos wallet. no pay single rupee from your side.


कंपनी को कैसे फायदा होता है 

देखिए पहले तो कंपनी  हमसे जो 12 सो रुपए लेती है वह एक इनकम का जरिया है ।

उसके बाद pikflick नाम का एक ऐप है जो जॉइन करता है उसे इस्तेमाल करना होता है और उसी से ही ₹20 कस्टमर को मिलते हैं तो उससे कंपनी का रेवेन्यू जनरेट होता है!

 तीसरा कंपनी का खुद का एक शॉपिंग साइट है जिस पर कई ब्रांडेड प्रोडक्ट्स उपलब्ध है उससे भी कंपनी को आय प्राप्त होती है!

 और चौथा हर 4 महीने बाद कंपनी को अपने कस्टमर से 1200 रुपए फिर से मिल जाते हैं इस तरह कंपनी आय प्राप्त करती है और उसी में से जो इसके साथ जोड़ते हैं उनको लाभ देती है


हमें कैसे लाभ मिलेगा

हम जब 1200 रुपए दे कर प्रीमियम प्लान लेते हैं उसी टाइम कंपनी हमें ₹400 वाले तीन शॉपिंग कूपन देती है उससे ही हमारे 1200 रुपए मिल जाते हैं!

उसके बाद कंपनी का जो pikflick ऐप है उसे कुछ मिनट तक इस्तेमाल करने से कंपनी रोजाना ₹20 प्रतिदिन देती है यानी महीने का ₹600 मतलब 2 महीने में हमारे 1200 रुपए हमें प्राप्त हो जाएंगे उसके बाद हमें कोई भी नुकसान नहीं हो सकता, और ये इनकम आपको हमेशा मिलता हैं आपको खाली कुछ समय इनके Pikflick Application को use करना हैं,

अब और भी पैसा कमाना है तो यहां से शुरू हो जाता है नेटवर्क मार्केटिंग का असली बिजनेस तो देखते हैं यह कैसे काम करेगा!


तो कि यह नेटवर्क मार्केटिंग बिजनेस है तो हमें और लोग हमारे साथ जोड़ना होगा तो हमारे नीचे हम अगर 10 लोगों को जोड़ेंगे तो एक ₹1 करके हमें 10 लोगों के ₹10 प्रतिदिन मिलेगा यानी महीने का 300 रुपए,

 उसके बाद वह 10 लोग उनके नीचे 10 10 लोगों को जोड़ेंगे तो ₹2 के हिसाब से ऐसा सिलसिला सातवें लेवल तक चलता जाएगा और उतना ही ज्यादा प्रतिदिन पैसा मिलेगा जितना ज्यादा लोगों को जोड़ोगे उतना ज्यादा मुनाफा होगा!

बहुत सारे नेटवर्क मार्केटिंग के प्लान होते हैं लेकिन यह मात्र ₹1200 में सीमित नुकसान का प्लान है वह भी बंद होने के चांसेस बहुत ही कम है इसीलिए हम इसमें आराम से ज्वाइन कर सकते हैं 




Monday, October 19, 2020

Forex Market Kya Hai

 "फॉरेक्स मार्केट की दुनिया"

 


आज हम फाइनेंसियल मार्केट का एक और प्रकार जिसका नाम करंसी मार्केट है उसके बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे। हर एक देश की अपनी-अपनी करंसी होती है। और हर एक करंसी का अलग-अलग रेट होता है। जैसे भारत का रुपया, अमेरिका का डॉलर, ब्रिटेन का पाउंड। जिस तरह शेयर बाजार में शेयर की खरीदी बिक्री होती है उसी तरह फॉरेक्स मार्केट विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार है!

एक करेंसी की तुलना में दूसरे करेंसी में दैनिक उतार-चढ़ाव आता है। जैसे अमेरिकी $1 की कीमत भारतीय रुपए में लगभग ₹73 है। इसमें भारतीय कारक, वैश्विक कारक के वजह से दैनिक उतार-चढ़ाव होता है।


भारत मे करंसी मार्केट को दो भाग मे बाटा गया।

1) Indian Currency

2) Cross Currency

वर्तमान में भारतीय बाजार में करेंसी ट्रेडिंग करने के लिए चार पीयर उपलब्ध है।

USD/INR

EUR/INR

GBP/INR

JPY/INR

हम इन चार करेंसी पियर में भारतीय ट्रेडिंग एक्सचेंज जो सेबी और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के दायरे में काम करते हैं उनके द्वारा इसमें खरीदी बिक्री कर सकते हैं। इसके लिए भी डिमैट अकाउंट की आवश्यकता होती है। हम जब ब्रोकर के द्वारा डिमैट अकाउंट चालू करते हैं तब हम फॉरेक्स ट्रेडिंग के लिए करेंसी अकाउंट भी चालू कर सकते हैं। उस अकाउंट द्वारा हम इन चारों में ट्रेडिंग कर सकते हैं।


" कैसे करेंगे ट्रेडिंग"

भारतीय बाजार में ट्रेडिंग

सबसे पहले तो हमें डीमैट अकाउंट की आवश्यकता होगी, डिमैट अकाउंट के साथ हमें करेंसी अकाउंट ओपन करना होगा। उसके बाद हमें उन चारों करेंसी में से जिसमें ट्रेड लेना है ब्रोकर के टर्मिनल से उस करेंसी पियर पर जाना होगा।

वर्तमान में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के करेंसी डेरिवेटिव में यूएसडी/आईएनआर (USD/INR) के लिए फ्यूचर और ऑप्शन दोनों ट्रेडिंग के प्रकार उपलब्ध है। मान लीजिए हमें लगता है कि यूएसडी की कीमत आगे बढ़ने वाली है तो हम फ्यूचर का एक लॉट खरीद सकते हैं ।

एक लॉट का साइज 1000 क्वांटिटी के बराबर होता है। वर्तमान में यूएसडी/आईएनआर का प्राइस 73.3700 चल रहा है

यानी हमें 1 यूएसडी/आईएनआर का फ्यूचर का लॉट खरीदने के लिए 73370 रुपए की आवश्यकता होगी, लेकिन ब्रोकर हमें मार्जिन प्रोवाइड करता है। ध्यान रखिए फ्यूचर के कॉन्ट्रैक्ट की  मासिक एक्सपायरी डेट होती है, उससे पहले हमें सौदे से निकलना पड़ता है।


"अंतरराष्ट्रीय बाजार में ट्रेडिंग"

 


करेंसी में अंतर्राष्ट्रीय बाजार मे किसी डीलर के माध्यम से ट्रेडिंग कर सकते हैं।

EUR/USD

USD/JPY

GBP/USD

AUD/USD

यह अंतरराष्ट्रीय बाजार में सबसे ज्यादा ट्रेडिंग होने वाली करंसी पेयर है। जैसे हम शेयर मार्केट में शेयर में खरीदारी बिक्री करते हैं, उसी तरह फॉरेक्स मार्केट में करंसी में ट्रेडिंग करते हैं।

वर्ल्ड कि जितनी करेंसी है उनमें फॉरेक्स मार्केट में ट्रेड होता है। लिक्विडिटी के नुसार  वर्ल्ड का सबसे बडा मार्केट है।


"फॉरेक्स मार्केट में कौन-कौन ट्रेड करते हैं"

1) सरकार की तरफ से मध्यवर्ती बँक:-

सरकार को अंतरराष्ट्रीय व्यापार में आयात के लिए उनके देश की मुद्रा की आवश्यकता होती है। इसलिए हमें अपने रुपए को उनके करेंसी में रूपांतरित करना होता है। और किसी भी देश के एक मुद्रा की तुलना में दूसरे मुद्रा में उतार चढ़ाव आता है । इसीलिए भारत में रिजर्व बैंक अपने रुपए को स्थिर रखने के लिए इसमें ट्रेड करती है।


2) विदेश मे कार्यरत कंपनी :-

जो भारतीय कंपनियां विदेश में कार्यरत होती है उनको अपने कर्मचारियों को विदेशी करेंसी में भुगतान करना होता है। जैसे टीसीएस है, इंफोसिस है, विदेशी करन्सी मे उतार चढाव को देखते हुए अपने रिझर्व को सुरक्षित रखने के लिये विदेश मे कार्यरत कंपनिया ट्रेड करती है।

 


3) आम निवेशक/ ट्रेडर्स :-

आम निवेशक जो करंसी ट्रेडिंग के मार्फत मुनाफा कमाना चाहते हैं वह इसमें ट्रेडिंग करते हैं। 


 

करन्सी मार्केट मे पिप PIP क्या है

Pip- point in percentage

1 यूएसडी की कीमत भारतीय रुपए में 73.4521 है

USD/INR= 73.4521

अब वह 73.4512 हो जाएगी तो

USD/INR= 73.4522

यहां पर 0.0001 की बढ़ोतरी हुई उसे हम एक पीप कहेंगे।

"मुद्रा बाजार को प्रभावित करने वाले कारक"

मुद्रास्फीति, सकल घरेलू उत्पाद (GDP) इन जैसे आर्थिक कारक करेंसी के उतार-चढ़ाव को कारणीभूत है। सरकार तथा RBI रिसर्व बँक की मोद्रीक नीती, दो देश के बीच व्यापार स्थिती, राजनैतिक अस्थिरता इ. कारक करन्सी के मूल्य पर प्रभाव डालते है। 

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Friday, October 16, 2020

Commodity Market kya hai


"ट्रेडिंग का एक विकल्प:- कमोडिटी मार्केट"



फाइनेंसियल मार्केट में स्टॉक मार्केट और कमोडिटी मार्केट (Commodity Market)  ऐसे प्रकार है! स्टॉक मार्केट में शेयर की खरीदी बिक्री होती है, तो कमोडिटी मार्केट में कमोडिटी खरीदी बिक्री होती है, दोनों मार्केट की अपनी-अपनी विशेषताएं हैं और भिन्नता ये है! तो आज हम कमोडिटी मार्केट के बारे में जानकारी हासिल करेंगे !


"कमोडिटी मार्केट"

कमोडिटी वस्तुओं का एक ऐसा समूह है जिसे खरीदा और बेचा जा सकता है। पहले किसी कमोडिटी को खरीदने और बेचने के लिए दो और दो से ज्यादा व्यक्ति एक जगह पर आकर यह प्रक्रिया करते थे, उसे हम स्पॉट ट्रेडिंग (spot trading) कहते हैं। जैसे अनाज की मंडी, इसमें हम वस्तुु की डिलीवरी लेकर उसका नगद भुगतान करते थे।

अब वर्तमान में इलेक्ट्रॉनिक कमोडिटी एक्सचेंज के माध्यम से हम कमोडिटी की ट्रेडिंग वायदा कारोबार में करते हैं। इसमें हमें ना ही कोई कमोडिटी को किसी जगह पर ले जाकर बेचना पड़ता है, ना ही नगद भुगतान करना पड़ता है। इसकी ऑनलााइन खरीदी बिक्री होती है।

जिस तरह हम शेयर बाज़ार में शेयर की खरीदी बिक्री करते हैं उसी तरह कमोडिटी मार्केट में सोना, चांदी, क्रूड ऑयल इन जैसे कमोडिटी की खरीदी बिक्री करते हैं ! इसीलिए इसे कमोडिटी मार्केट कहा जाता है!

इसमें हम मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) द्वारा ट्रेडिंग कर सकते हैं। इस में सोना, चांदी, क्रुड ऑयल, कॉपर, एलुमिनियम, नेचुरल गेस इत्यादि में हम खरीदी बिक्री कर सकते हैं। यह खरीदी बिक्री फ्यूचर के तौर पर होती है। जिस तरह इक्विटी मार्केट में हम कोई भी शेयर फ्यूचर में लॉट के माध्यम से खरीद सकते हैं, उसी तरह कमोडिटी मार्केट में भी कोई भी कमोडिटी का लॉट एक मा, दो माह, तीन माह के लिए खरीद सकते हैं। इसमें भी हमें मेगा मेगा लॉट और मिनी लॉट ऐसे दो ऑप्शन मिलते हैं।


"कमोडिटी मार्केट और स्टॉक मार्केट में क्या अंतर है !" 


शेयर मार्केट :-

1) शेयर की खरीदी बिक्री होती हे !

2) स्टॉक मार्केट में हम खुद के पैसे से शेयर खरीद कर उसे लंबे समय तक रख सकते हैं!

3) NSE और BSE ऐसे दो एक्सचेंज होते हैं!

4) इसमें बैंकिंग, फार्मा, टेक्नोलॉजी, सर्विस, इत्यादि. सेक्टर होते हैं !


कमोडिटी मार्केट :-

1) इसमें कमोडिटी की खरीदी बिक्री होती है जैसे सोना, क्रूड ऑयल।

2) कमोडिटी मार्केट मे future trading के वजह से इसकी एक्सपायरी डेट होती है!

3) MCX और NCDEX और भी चार एक्सचेंज है।

4) MCX मे बुलियन, बेस मेटल और एनर्जी यह प्रकार होते है। 


"कमोडिटी मार्केट के 6 प्रमुख एक्सचेंज"

1) Multi Commodity Exchange

2) National Commodity & Derivative Exchange

3) National Multi Commodity Exchange

4) Indian Commodity Exchange

5) Ahmedabad Commodity Exchange

6) Universal Commodity Exchange


" कमोडिटी मार्केट में कैसे ट्रेड करें"

जिस तरह शेयर बाजार में शेयर खरीदी करने के लिए हमें डीमैट अकाउंट के माध्यम से शेयर खरीदना पड़ता है, उसी तरह इसमें भी किसी ब्रोकर के पास हम डीमेट अकाउंट चालू करके उसके माध्यम से MCX और NCDX इन जैसे एक्सचेंज द्वारा हम उपलब्ध कमोडिटी में ट्रेडिंग करते हैं। कमोडिटी ट्रेडिंग वायदा कारोबार में उपलब्ध है। यह एक माह से लेकर 6 माह तक का फ्यूचर कांट्रैक्ट रहता है, और इसमें मेगा लॉट और मिनी लॉट ऐसे दो प्रकार आते हैं।


"मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर उपलब्ध कमोडिटी"

बेस मेटल :- तांबा, एल्युमीनियम, लेड, जिंक, निकेल etc.

बुलियन :- सोना, चांदी

एनर्जी :-  क्रूड ऑयल और नेचुरल गैस 

कृषि कमोडिटी :- कॉटन इलायची काली मिर्च रब्बर इत्यादि

इन सब कमोडिटी में क्रूड ऑयल, सोना, चांदी इसमें सबसे ज्यादा ट्रेडिंग होती है !


"कमोडिटी के कीमत का निर्धारण"

कमोडिटी मार्केट में भी मांग और आपूर्ति द्वारा कीमत का निर्धारण होता है। किसी कमोडिटी की मांग ज्यादा होगी तो उसकी कीमत बढ़ने लगेगी, उस तरह सरकार नई नई पॉलिसी लाती है, उसका भी प्रभाव कमोडिटी पर गिरता है। मान लीजिए किसी क्रूड ऑयल उत्पादन करने वाले देश ने उसका उत्पादन रोक दिया तो आपूर्ति में कमी के कारण क्रूड ऑयल की कीमत बढ़ेगी। अंतर्राष्ट्रीय कारक भी कमोडिटी की कीमत निर्धारण का महत्वपूर्ण घटक है। कृषि कमोडिटी में कृषि उत्पादन मे वृद्धि और घट दोनों ही उनके कीमत निर्धारण में महत्वपूर्ण घटक है। इस तरह कमोडिटी मार्केट में उतार-चढ़ाव होता है।

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 • Equity Fund ke prakar








Tuesday, October 13, 2020

Debt fund meaning and it's benifits and types

 " डेब्ट फंड क्या है?"



आज हम डेब्ट म्यूच्यूअल फंड के बारे में जानेंगे।उसके कौन से प्रकार है और उसकी क्या जोखिम हो सकती है ! तकनीकी दृष्टि से इक्विटी से यह कैसे अलग है।


"डेब्ट फंड"

इस तरह के म्यूच्यूअल फंड में फिक्स्ड इनकम सिक्योरिटी (fixed income security) के लिए निवेश किया जाता है, जैसे सरकारी बॉन्ड (govt. Bond),  कॉरपोरेट बॉन्ड।

 सरकारी बॉन्ड में निवेश की वजह से इसमें रिस्क नहीं रहता तथा इन फंड की परिपक्वता अवधि पहले से ही निश्चित रहती है! इनके short duration, long duration debt fund, dynamic bond fund, corporate bond fund, liquid fund ऐसे अनेक प्रकार है।

Debt का मतलब ऋण होता है और फंड में हम किसी सरकारी कंपनी, कॉर्पोरेट को एक प्रकार का ऋण देते हैं और उस बदले वह बॉण्ड जारी कर के हमें लाभ देती है! इन पर जो लाभ मिलता है वह पहले से ही निर्धारित होता है! तथा उसकी परिपक्वता अवधी  निश्चित होती है!

हमने देखा जिस तरह इक्विटी mutual फंड के अलग-अलग प्रकार है, उसी तरह डेब्ट फंड के भी अलग-अलग प्रकार आते हैं! इक्विटी फंड मे मुनाफा और जोखिम मार्केट पर निर्धारित होती है लेकिन डेब्ट फंड में वह फिक्स होती है!


"डेट फंड के निम्नलिखित प्रकार है।"



1) अल्ट्रा शॉर्ट ड्यूरेशन फंड:-

यह कम अवधि वाली डेब्ट फंड की स्कीम है! इसमें 3 से 6 महीने में परिपक्व होने वाले फिक्स्ड इनकम इंस्ट्रूमेंट में पैसा लगाया जाता है! यह एक open-ended डेब्ट स्कीम है! निवेशक को एक से 6 महीने के लिए किसी म्युचुअल फंड में पैसा लगाना हो तो वह इस फंड में लगा सकते हैं!


2) शॉर्ट ड्यूरेशन फंड :-

जिन निवेशकों का डेब्ट फंड में निवेश करने का नजरिया 3 महीने से ज्यादा लेकिन 1 साल तक हो उनके लिए यह फंड है। शॉर्ट टर्म फंड में फंड मैनेजर निवेशकों का पैसा मनी मार्केट, टी बिल्स, कमर्शियल पेपर, गिल्ट, बॉन्ड आदि मे लगाता है।


3) डायनॅमिक बॉण्ड फंड :-

इस फंड मे फंड मॅनेजर विविध अवधी मे परिपक्व होने वाली प्रतिभूतीयो मे निवेश करते है। बदलते ब्याज दर के कारण इसका पोर्टफोलियो भी बदलता है, और परिपक्वता अवधि में भी बदल होता है।


4) लिक्वीड फंड :-

बचत खाते में पैसा रखे तो कम ब्याज मिलता। लिक्विड फंड में निवेश करने से उसकी परिपक्वता अवधि कम होने के कारण कुछ महीने पैसे रखकर बचत खाते से ज्यादा ब्याज मिलता है! जिन निवेशकों को अपना पैसा debt fund में तीन महीने के लिए लगाना है, वह इस में निवेश कर सकते हैं! लिक्विड फंड अपना पैसा मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट, कमर्शियल पेपर में लगाते है!


5) गिल्ट फंड :-

गिल्ट फंड का निवेश भारत सरकार, राज्य सरकार तथा भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी प्रतिभूति में ही किया जाता है! इस वजह से इस फंड का जोखिम शुन्य होता है! यह फंड कर मुक्त है, तथा जब चाहे तब राशि मिल सकती है, और साथ में इसकी जोखिम भी शून्य है। इस वजह से बाकी फंड के तुलना में इसका लाभ भी कम है।


6) इनकम फंड :-

1 साल से ज्यादा लंबी अवधि के परिपक्वता अवधि वाले डेब्ट फंड इन्स्ट्रुमेंट्स मे इस फंड का निवेश किया जाता है। जिनका लक्ष्य काल एक साल से ज्यादा है वह इस फंड में निवेश कर सकते हैं।


7) मनी मार्केट फंड :- 

यह एक डेब्ट प्रतिभूतियों में निवेश होने वाला फंड है। इस फंड में हमें एक फिक्स इनकम मिलता है। जब ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव आता है, तब यह फंड कार्य करते हैं। इस वजह से इन्हें लिक्विड फंड भी कह  सकते हैं। इसमें भी कम अवधि के लिए पैसे लगाए जाते हैं, और यह पैसा फिक्स  इनकम इंस्ट्रूमेंट में लगता है।

इसके अलावा भी डेब्ट फंड के कई प्रकार है।

जैसे कॉरपोरेट बॉन्ड फंड, 

क्रेडिट रिस्क फंड,

बैंकिंग एंड पीएसयू फंड।

लोंग ड्यूरेशन डेब्ट फंड!


"डेब्ट म्यूचुअल फंड के फायदे"



हमने देखा कि डेब्ट म्यूचुअल फंड अपना पैसा सरकारी कंपनियां, कॉर्पोरेट बॉन्ड, सरकारी बॉन्ड इन जैसे फिक्स इनकम सिक्योरिटी में लगाते हैं।

इसलिए इक्विटी म्यूचुअल फंड की तुलना में हमें डेब्ट म्यूचुअल फंड में थोड़ा मुनाफा कम मिलता है। लेकिन रिस्क भी कम होता है। साधारण ता डेब्ट म्यूचुअल फंड में 7 से 12 परसेंट तक रिटर्न मिलते हैं। मार्केट के उतार-चढ़ाव में हम डेब्ट फंड का पैसा कभी भी निकाल सकते हैं, और उस पर हमें फिक्स रिटर्न ही मिलेगा। लेकिन इक्विटी फंड में ऐसा नहीं होता है। हो सकता है हमारा पोर्टफोलियो मार्केट के मंदी के दौर में लॉस में चला जाए। बैंक के फिक्स डिपाजिट की तुलना में डेब्ट फंड में थोड़ा रिटर्न ज्यादा मिलता है, लेकिन हम देखते हैं कि फिक्स डिपॉजिट में पैसा निर्धारित समय के लिए लॉक करना पड़ता है। लेकिन डेब्ट फंड में हम यह पैसा कभी भी निकाल सकते हैं।


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Thursday, October 8, 2020

Equity Mutual fund

 "Equity Mutual fund and its types"



आज हम जानेंगे इक्विटी म्यूचुअल फंड (Equity mutual fund) क्या होता है, और इसके कौन-कौन से प्रकार है और कौन से इक्विटी फंड भविष्य में अच्छा मुनाफा दे सकते है!

"इक्विटी म्यूचुअल फंड"

जिस फंड में निवेशकों का पैसा फंड मैनेजर इक्विटी मार्केट यानी शेयरों में लगाता है, उसे हम इक्विटी म्यूचुअल फंड कहते हैं! साधारणता कुल निवेश का 60%-90%  तक पैसा इस फंड में लगाया जाता है!


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"इक्विटी म्यूचुअल फंड के प्रकार"

भौगोलिक आधार, बाजार पूंजीकरण, मुनाफे के प्रकार के अनुसार इक्विटी म्यूचुअल फंड के अलग-अलग प्रकार होते हैं! 

इसमें बाजार पूंजीकरण (Market Capitalisation) के अनुसार इस फंड के निम्न ( 4 ) चार प्रकार है!


1) स्मॉल कैप इक्विटी फंड:- 


इसमें फंड मैनेजर कुल परिसंपत्ति (Asset) का 60 से 65% निवेश स्मॉल कैप इक्विटी फंड में लगाते हैं! इस फंड में ज्यादा अस्थिरता (Volatility) होनेेेेे के कारण रिस्क ज्यादा होता है, और मुनाफा भी अच्छा मिल सकता है! इसलिए ज्यादा जोखिम उठाने वाले निवेशक ही इसमे निवेश करें तो योग्य होगा!


2) मिड कैप इक्विटी फंड:-

बाजार पूंजीकरण के हिसाब से शीर्ष 101 से 250 जो कंपनियां होती है उन्हें मिड कैप कंपनियां कहते हैं; और उसी में कंपनियों का मुनाफा, भविष्य की स्थिति, बैलेंस शीट यह सब देख कर इस फंड मे निवेश किया जाता है! लार्ज कैप फंड से इसमें थोड़ा ज्यादा जोखिम रहता है!


3) लार्ज कैप इक्विटी फंड:- 


बाजार पूंजीकरण के हिसाब से शीर्ष (Top) 100 जो कंपनियां होती है उन्हें लार्ज कैप कंपनियां कहते हैं; और इन कंपनियों में इस फंड का पैसा लगाया जाता है! लार्ज कैप इक्विटी फंड में स्थिरता ज्यादा रहती है, इस वजह से इसमें कम जोखिम और साथ में मुनाफा भी कम मिलता है!


4) मल्टिकॅप इक्विटी फंड:- 

 इस तरह के फंड में फंड मैनेजर सभी कॅप के शेयर में थोड़ा थोड़ा निवेश करते हैं! निवेश पर ज्यादा रिटर्न कमाने के लिए फंड मैनेजर इस तरह के फंड में पैसा लगाते हैं!

आप जब भी किसी भी फंड में पैसा लगाओगे तो उसे लंबी अवधि के लिए लगाना उचित रहेगा, कम से कम 5 से 7 साल के लिए ताकि भविष्य में हमें अच्छा मुनाफा होगा!


"निवेश की रणनीति के अनुसार इक्विटी फंड के प्रकार"


Contra fund :- 

जो कंपनी वर्तमान में कमजोर प्रदर्शन कर रही है लेकिन पहले अच्छा प्रदर्शन कर रही थी उस कंपनी में इस फंड का निवेश किया जाता है, क्योंकि फंड मैनेजर को लगता है कि लंबी अवधि में आगे चलकर यह कंपनियां अच्छा प्रदर्शन करेगी और निवेशको को अच्छा मुनाफा मिलेगा!


Sectoral Equity fund:- 

इस तरह के फंड में किसी निश्चित सेक्टर के शेयर में पैसा लगाया जाता है! जैसे बैंकिंग सेक्टर, फार्मा, टेक्नोलॉजी, सर्विस, ऑटो सेक्टर, इत्यादि. कोई सेक्टर आगे अच्छा प्रदर्शन करेगा इस उम्मीद पर इसमें पैसा लगाया जाता है! लेकिन वह सेक्टर अच्छा प्रदर्शन नहीं करेगा तो निवेशकों को नुकसान होगा!


Focused equity fund:-


मध्यम जोखिम उच्च मुनाफा (moderate risk & higher return) के तौर पर इस फंड में निवेश किया जाता है! इस फंड में वर्तमान में जो शेयर अच्छे प्रदर्शन कर रहे हैं उनमें 60% पैसा ज्यादा से ज्यादा 30 शेयरों में लगाया जाएगा!


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"लाभ के वितरण और भविष्य के ग्रोथ का नजरिया रखकर इक्विटी म्यूच्यूअल फंड को वर्गीकृत किया गया है!"


Dividend fund:-

इस तरह के फंड में फंड मैनेजर निवेशकों का पैसा ऐसे स्टॉक में लगाता है जो अच्छा लाभांश दे रही है!


Value Equity Fund:- 

इसमें फंड मैनेजर ऐसे शेयर को ढूंढता है जो वर्तमान में कमजोर प्रदर्शन (Under perform) कर रहे हैं लेकिन भविष्य में अच्छा प्रदर्शन करने की उनकी क्षमता (Potential) है! वर्तमान में जिस शेयर पर दांव लगाया जाता है वह कम दाम पर मिल जाते हैं और भविष्य में अच्छा मुनाफा देते हैं इस वजह से इस फंड में अच्छा रिटर्न मिलता है!


Growth Equity Fund:-

इस फंड में जो शेयर होते हैं उनपर लाभांश नहीं मिलता है! लेकिन इन शेयर की कीमत दिन ब दिन बढ़ती जाती है! इसीलिए लंबी अवधि में वह अच्छा मुनाफा देकर जाते हैं!


"टैक्स प्लानिंग के अनुसार इक्विटी फंड के दो प्रकार आते हैं"


1) टैक्स सेविंग इक्विटी फंड (ELSS) :-

इस फंड में 80 से 85 % निवेश इक्विटी मार्केट में किया जाता है! ELSS का 3 साल का लॉक इन पीरियड होता है; 3 साल तक हम पैसा रखेंगे तो हमें आयकर अधिनियम 80C के अंतर्गत कर में छूट मिलेगी!

(ELSS:- Equity Link Saving Scheme)


2) नॉन टैक्स सेविंग इक्विटी फंड:- 

जो ELSS के अंतर्गत नहीं आते उन पर हमें टैक्स देना पड़ता है! अल्पावधि पूंजीगत लाभ कर (Short term capital gain tax) तथा दीर्घावधि पूंजीगत लाभ कर (Long term capital gain tax) दो ना हमें इन इक्विटी फंड पर कर देना पड़ता है!



"निवेशकों के फंड के प्रबंधन के अनुसार इक्विटी म्युचुअल फंड के निम्न दो प्रकार आते हैं!"


1) Active Equity Fund:-

इसमें फंड मैनेजर फंड के शेयरों में क्या हलचल हो रही है, आगे शेयर में क्या हो सकता है, यह सब देखते हैं! इसलिए इनका एक्सपेंस रेशों (Expense Ratio) ज्यादा होता है!


2) Passive Equity Fund:-

इसमें फंड मैनेजर का कोई नियंत्रण नहीं होता है! इंडेक्स फंड, ईटीएफ (ETF) इसमें फंड का निवेश होता है! यानी जैसे जैसे इंडेक्स बढ़ता है वैसे वैसे निवेशकों को मुनाफा होता है!


इस तरह इक्विटी फंड में निवेश करने के लिए तरह-तरह के विकल्प हमारे पास उपलब्ध है! इसलिए जाने कौन सा इक्विटी फंड सबसे अच्छा है और सोच समझकर इक्विटी फंड में निवेश करें!


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Tuesday, October 6, 2020

Mutual Fund SIP vs LUMSUM INVESTMENT

 "Systematic investment plan VS lumsum investment"
म्यूचुअल फंड में मासिक निवेश (SIP) और एकमुस्त निवेश


आज हम जानेंगे म्यूचुअल फंड में सिस्टमैटिक निवेश और एकमुश्त निवेश में से कौन सा फायदेशीर है, और उनके अलग-अलग लाभ क्या है! तथा दोनों के लाभ की तुलना करेंगे! 

म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) क्या है

हर किसी व्यक्ति को शेयर बाजार में पैसा लगाकर उसे बढ़ाने की चाहत होती है, लेकिन शेयर बाजार का कम ज्ञान और समय की कमतरता के वजह से वह अपना पैसा यहां लगाने से डरता है !

इसीलिए निवेशक को कम जोखिम लेकर पैसा लगाने के लिए म्यूच्यूअल फंड (MUTUAL FUND) एक ऑप्शन है !

म्यूच्यूअल फंड (MUTUAL FUND)एक ऐसा माध्यम है जिसमें बहुत से निवेशकों का पैसा एक साथ जमा करके वह कोई भी कंपनी की  asset management company (AMC) और उनके मैनेजर मिलकर निवेशक का पैसा शेयर बाजार में लगाते हैं! यह सेबी द्वारा रजिस्टर कॉरपोरेट संस्था होती है ! म्यूचल फंड मैनेजर दीर्घकालीन अनुभव और बाजार की रणनीति से अच्छे वाकिफ होते हैं इसीलिए म्यूचल फंड में रिस्क थोड़ा सा कम हो जाता है! इसीलिए कम जोखिम वाले निवेशकों के लिए म्यूच्यूअल फंड एक अच्छा विकल्प है! इसी कारणवश वर्तमान में भारत में म्यूचुअल फंड में बहुत मात्रा में निवेशकों का पैसा यहां इन्वेस्ट करने के लिए आ रहा है!


यह पढे:- what is mutual fund and how to invest


"एसआईपी (Systematic investment plan SIP) का अर्थ और फायदे"


एसआईपी म्यूचुअल फंड में निवेश करने का वह तरीका है जिसमें निवेशक मासिक त्रमासिक नियमित निवेश करता है! हर एक म्यूच्यूअल फंड कंपनियां निवेशकों को एसआईपी (SIP) का विकल्प उपलब्ध कराती है; भविष्य की योजना के लिए, बच्चों की शिक्षा, निवृत्ति इत्यादि के लिए एसआईपी में पैसा लगाना उचित होता है! क्योंकि हमें मासिक निवेश से बचत की आदत होती है और वह पैसा कुछ सालों बाद जब हम चाहे तब एक साथ मिलता है!


"एसआईपी (SIP) के फायदे"

एसआईपी के फायदे निम्नवत है !

1) बाजार के उतार-चढ़ाव में उपयोगी:-

एसआईपी के माध्यम से हम एक निश्चित मासिक कालावधी को खरीदारी करते हैं, इस वजह से बाजार के उतार-चढ़ाव को ध्यान में रखकर निवेश का संतुलन बना रहता है! बाजार में अगर मंदी भी आएगी तो हमें उस मंदी में खरीदारी मिलेगी और आगे चलकर मुनाफा देगी; इसलिए एसआईपी एक अच्छा विकल्प है!


2) मात्र ₹500 से शुरुआत:-

म्यूच्यूअल फंड कंपनियां हमें एसआईपी में निवेश करने के लिए कम से कम ₹500 से शुरुआत का विकल्प देती है! 

यानी साधारण से साधारण व्यक्ति भी म्यूचुअल फंड में मासिक निवेश से भविष्य के लिए पैसा बचत कर सकता है!


3) भविष्य की योजना में उपयोगी:-

एसआईपी से मासिक निवेश से हम दीर्घ अवधि में निवेश करके भविष्य के योजना के लिए जैसे बच्चों का शिक्षण, बच्चों की शादी, चार पहिया वाहन खरीदी इन जैसे उद्देश्यों के लिए हम पैसे इकट्ठा कर सकते हैं!  और साथ में अच्छा-खासा मुनाफा भी हासिल कर सकते हैं!


4) बचत की आदत:- 

म्यूचुअल फंड में एसआईपी करने से हमें मासिक बचत की आदत हो जाती है, क्योंकि एसआईपी में हमें मासिक त्रैमासिक पद्धति से निवेश करना होता है!


"Systematic investment plan और lumsum Investment की तुलना"


यहां हम HDFC Midcap opportunity (D) Growth Plan के एसआईपी और एकमुश्त निवेश की तुलना करेंगे!

15 फरवरी 2019 को हमने 1 साल का एसआईपी और lumsum निवेश किया, तो हमें एकमुश्त निवेश में एसआईपी से दोगुना मुनाफा मिल रहा है! यही हमने 15 फरवरी 2013 से एसआईपी में निवेश करना शुरू किया तो हमें 15 फरवरी 2020 में 67.20%  का 7 साल का टोटल मुनाफा मिलेगा!

 लेकिन वही हम एकमुश्त निवेश में देखेंगे तो हमें 2013 में किए गए निवेश पर वार्षिक 18.80% CAGR Method के अनुसार, और 7 साल के बाद 234.78%  मुनाफा मिल रहा है!

(CAGR-compound annual growth rate)

इस फंड में हमें SIP की तुलना में एकमुश्त निवेश में अच्छा खासा मुनाफा देखने को मिल रहा है! मार्केट दिन-ब-दिन तेजी में रहेगा तो एकमुश्त निवेश में निरंतर अच्छा मुनाफा ही होगा!

यह पढे:- Types of mutual fund


"एकमुश्त निवेश (Lumsum investment) और उसके फायदे"


म्यूचुअल फंड में जब हम एक साथ बड़ी राशि किसी निर्धारित समय एक बार में ही लगाते हैं उसे एकमुश्त निवेश (Lumsum Investment) कहते हैं! एकमुश्त निवेश के लिए हमें ज्यादा राशि के निवेश की आवश्यकता होती है; तथा उचित समय पर किया गया एकमुश्त निवेश ही फायदेशीर होता है! नहीं तो आप खरीदोगे ऊंचे दाम पर और फिर बाद में सोचोगे मुझे मुनाफा क्यों नहीं हो रहा, इसलिए मार्केट में उचित समय में निवेश की आवश्यकता होती है!


Lumsum Investment के फायदे


1) SIP की तुलना में ज्यादा मुनाफे दार:-

SIP मैं हम मासिक एक छोटी राशि किसी भी म्यूच्यूअल फंड में लगाते हैं जो रुपए की औसत लागत और Power of Compounding पे काम करती है; किंतु एकमुश्त निवेश में जब मंदी के मार्केट में हम पैसा लगाएंगे तो दीर्घावधि में हमें SIP से ज्यादा मुनाफा मिलेगा!


2) कम दाम पर निवेश करने का मौका:-

 मार्केट में तेजी और मंदी एक के बाद एक आती है! जब आर्थिक मंदी या अन्य नकारात्मक वार्ता बाजार में आती है तो उसका परिणाम मार्केट पर और सभी शेयरों पर दिखता है; और एक स्तर तक मार्केट नीचे गिरता है! उस समय हम किसी भी म्यूच्यूअल फंड में एकमुश्त निवेेेेेेेेश Lumsum Investment करेंगे तो हमें भविष्य मेंं अच्छा मुनाफा होगा, क्योंकि जब हम खरीदारी करेंगे तो किसी भी फंड का NAV नीचे रहेगा!


3) सुविधाजनक:-

जिस व्यक्ति के पास ज्यादा राशि एक साथ होती है वह एकमुश्त निवेश के द्वारा किसी भी म्यूच्यूअल फंड में पैसा लगा सकता है; किंतु वही पैसा अगर एसआईपी sip में लगाएगा तो उसे अपने बैंक अकाउंट में मासिक देय राशि रखना पड़ेगा! इसीलिए उचित समय पर एक बार पैसा लगाकर भविष्य में हम अच्छा मुनाफा कमाएंगे!


Read more:- mutual fund / Insurance / share market / types of mutual fund




Saturday, October 3, 2020

Types of mutual fund

"म्यूचुअल फंड के प्रकार"


आज हम जानेंगे म्यूचुअल फंड के कौन-कौन से प्रकार है! किस किस आधार पर म्यूच्यूअल फंड का वर्गीकरण किया गया है; जैसे उसके उद्देश्य के आधार पर, उसके स्ट्रक्चर के आधार पर, तथा डायरेक्ट-रेगुलर फंड, ग्रोथ फंड, डिविडेंड फंड, इत्यादि. 

तो हम जानेंगे निवेशक के निवेश के उद्देश्य के आधार पर कौन-कौन से म्यूच्यूअल फंड में हम निवेश कर सकते हैं; तो निवेशको का सर्वाधिक लंबी अवधि का पसंदीदा म्यूच्यूअल फंड का पहला प्रकार है इक्विटी फंड!


"निवेश के जोखिम के आधार पर प्रकार"

✓) इक्विटी फंड (Equity fund)


शेयर
मार्केट में जितना ज्यादा रिस्क उतना ज्यादा मुनाफा होता है! उसी तरह म्यूचल फंड में भी इक्विटी फंड ऐसा फंड है जिसमें निवेशकों का पैसा (90%+) शेयरों में लगता है; जिन निवेशकों को लंबी अवधि में अच्छा मुनाफा चाहिए होता है वह उचित समय में इन इक्विटी फंड में ही पैसा लगाते हैं!

 इक्विटी फंड पर शेयर मार्केट का सीधा असर दिखता है क्योंकि इक्विटी फंड का पैसा शेयरों में ही लगता ह, इसीलिए जब भी निवेशकों को इक्विटी फंड में पैसा लगाना होगा तो जब शेयर बाजार बहुत नीचे गिरेगा तो निवेशकों ने इक्विटी फंड में पैसा लगाना  जरूरी है यानी लंबी अवधि में हमें अच्छा खासा उस पर मुनाफा मिलेगा!

 इक्विटी फंड के कैपिटल के आधार पर इसके स्मॉल कैप, मिड कैप और लार्ज कैप ऐसे प्रकार होते हैं! (Smallcap, Midcap, Largecap)

 एक बात याद रखें अगर निवेशक 1 साल के अंदर फंड से बाहर निकल लेगा तो उसे एक परसेंट एग्जिट लोड (1% exit load) देना होगा !


✓) बैलेंस फंड/हाइब्रिड फंड


जिस फंड में शेयर मार्केट इक्विटी तथा सरकारी बॉन्ड, सरकारी प्रतिभूतियों में संतुलित निवेश किया जाता है उसे ही बैलेंस फंड (hybrid fund) कहते हैं! फंड के जोखिम केेेे अनुसार पैसों को इक्विटी और बॉन्ड में एक अनुपात में लगाया जाता है!इससे निवेशकों की बाजार सेे जुड़ी जोखिम कम हो जाती है!

 Aggressive, Balanced, Conservative ऐसे हाइब्रिड फंड के प्रकार होतेे हैं! 


✓) Debt Fund


इस तरह के म्यूच्यूअल फंड में फिक्स्ड इनकम सिक्योरिटी (fixed income security) के लिए निवेश किया जाता है, जैसे सरकारी बॉन्ड (govt. Bond),  कॉरपोरेट बॉन्ड.

 सरकारी बॉन्ड में निवेश की वजह से इसमें रिस्क नहीं रहता तथा इन फंड की परिपक्वता अवधि पहले से ही निश्चित रहती है! इनके short duration, long duration debt fund, dynamic bond fund, corporate bond fund, liquid fund ऐसे अनेक प्रकार है!

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"स्ट्रक्चर (structure) के आधार पर दो प्रकार"


1) ओपन एंडेड फंड (Open Ended Fund)

ओपन एंडेड स्कीम वह फंड होता है जिसमें कोई समयावधि नहीं होती है! निवेशक कभी भी इस फंड में निवेश कर सकता है; जब ओपन एंडेड फंड का न्यू फंड ऑफर (NFO) आता है तो उसका एक यूनिट का फेस वैल्यू ₹10 होता है! बाद में कुछ समयावधि बाद निवेशक को इस फंड में निवेश करना होगा तो वह वर्तमान चल रहे नेट ऐसेट वैल्यू (NAV) पर यूनिट खरीद सकता है! इस स्कीम को जब तक फंड मैनेजर या कोई भी रेगुलेशन बंद नहीं करती तब तक यह फंड चलते रहता है!

2) क्लोज एंडेड फंड (Closed Ended fund) 

क्लोज एंडेड फंड वह फंड होता है जिसका समय अवधि निश्चित होता है! जब कोई भी न्यू इनिशियल फंड ऑफर आता है तो उसी के साथ वह कितने समय तक रहेगा यह निश्चित होता है!

जब कोई न्यू फंड ऑफर आता है तभी हम क्लोज एंडेड फंड में निवेश कर सकते हैं; और इसका समय अवधि 3 से 5 साल का निर्धारित रहता है!हालांकि इसमें निवेशकों को बीच में फंड से निकलने के लिए एग्जिट रूट होता है!


"फंड के मुनाफे के तीन विकल्प"


1) ग्रोथ फंड (Growth Fund)

जब कोई भी निवेशक ग्रोथ फंड का विकल्प चुनता है तब समय के साथ उस फंडका मूल्य बढ़ता है! जब निवेशक उस फंड के यूनिट को बेचना चाहेगा तो वह बाजार मूल्य पर बेची जाएगी; इस तरह ग्रोथ फंड में नेट ऐसेट वैल्यू के मूल्य पर हमारा मुनाफा निर्धारित होता है!


2) डिविडेंड विकल्प (Dividend)

डिविडेंड विकल्पों में म्यूच्यूअल फंड मैनेजर अपने निवेशकों को मुनाफे के तौर पर समय-समय पर डिविडेंड देते हैं! यह विकल्प उन निवेशकों के लिए अच्छा है जिन्हें समय पर पैसों की आवश्यकता होती है; इस तरह डिविडेंड के रूप में निवेशक लाभ प्राप्त करते हैं!


3) लाभांश पुनर्निवेश विकल्प (dividend reinvestment option)

इस विकल्पों में निवेशक को जो लाभांश प्राप्त होता है वह उन्हें फिर से फंड के यूनिट खरीदने में लगाते हैं! इस तरह लाभांश से यूनिट खरीद कर यूनिट की संख्या बढ़ाते हैं!


"निवेश के माध्यम के आधार पर"

यहां पर निवेश का माध्यम का मतलब हम खुद से उस फंड में निवेश कर रहे हैं कि किसी ब्रोकर के माध्यम से, उस हिसाब से डायरेक्ट फंड और रेगुलर फंड ऐसे दो प्रकार आते हैं!


1) डायरेक्ट फंड (Direct Fund)

इस फंड में निवेशक बिना किसी मध्यस्था के किसी भी म्यूचुअल फंड में निवेश कर सकता है! इससे निवेशकों को कोई कमीशन देना नहीं पड़ता, इस वजह से इसका फायदा दीर्घकाल में दिखता है!


2) रेगुलर फंड (Regular Fund)

इस फंड में निवेश करने के लिए निवेशक किसी अभिकर्ता, मध्यस्था की सहायता लेता है! इस वजह से म्यूच्यूअल फंड कंपनी को इनमें कमीशन देना पड़ता है; और फंड का एक्सपेंस रेशों (Expense Ratio) बढ़ने के कारण म्यूचुअल फंड में डायरेक्ट फंड के तुलना में इसमें कम मुनाफा मिलता है!


इस तरह म्यूच्यूअल फंड के अलग-अलग प्रकार है; और हम विविध माध्यम से इनमें निवेश कर सकते हैं! वर्तमान में कोई कोई कंपनियां डायरेक्ट म्यूच्यूअल फंड का विकल्प उपलब्ध करा रही है, इस वजह से किसी भी म्यूच्यूअल फंड का एक्सपेंस रेशों कम होगा; जितना फंड का एक्सपेंस रेशों काम रहेगा उतना निवेशकों को मुनाफा अच्छा मिलेगा!



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