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Tuesday, October 13, 2020

Debt fund meaning and it's benifits and types

 " डेब्ट फंड क्या है?"



आज हम डेब्ट म्यूच्यूअल फंड के बारे में जानेंगे।उसके कौन से प्रकार है और उसकी क्या जोखिम हो सकती है ! तकनीकी दृष्टि से इक्विटी से यह कैसे अलग है।


"डेब्ट फंड"

इस तरह के म्यूच्यूअल फंड में फिक्स्ड इनकम सिक्योरिटी (fixed income security) के लिए निवेश किया जाता है, जैसे सरकारी बॉन्ड (govt. Bond),  कॉरपोरेट बॉन्ड।

 सरकारी बॉन्ड में निवेश की वजह से इसमें रिस्क नहीं रहता तथा इन फंड की परिपक्वता अवधि पहले से ही निश्चित रहती है! इनके short duration, long duration debt fund, dynamic bond fund, corporate bond fund, liquid fund ऐसे अनेक प्रकार है।

Debt का मतलब ऋण होता है और फंड में हम किसी सरकारी कंपनी, कॉर्पोरेट को एक प्रकार का ऋण देते हैं और उस बदले वह बॉण्ड जारी कर के हमें लाभ देती है! इन पर जो लाभ मिलता है वह पहले से ही निर्धारित होता है! तथा उसकी परिपक्वता अवधी  निश्चित होती है!

हमने देखा जिस तरह इक्विटी mutual फंड के अलग-अलग प्रकार है, उसी तरह डेब्ट फंड के भी अलग-अलग प्रकार आते हैं! इक्विटी फंड मे मुनाफा और जोखिम मार्केट पर निर्धारित होती है लेकिन डेब्ट फंड में वह फिक्स होती है!


"डेट फंड के निम्नलिखित प्रकार है।"



1) अल्ट्रा शॉर्ट ड्यूरेशन फंड:-

यह कम अवधि वाली डेब्ट फंड की स्कीम है! इसमें 3 से 6 महीने में परिपक्व होने वाले फिक्स्ड इनकम इंस्ट्रूमेंट में पैसा लगाया जाता है! यह एक open-ended डेब्ट स्कीम है! निवेशक को एक से 6 महीने के लिए किसी म्युचुअल फंड में पैसा लगाना हो तो वह इस फंड में लगा सकते हैं!


2) शॉर्ट ड्यूरेशन फंड :-

जिन निवेशकों का डेब्ट फंड में निवेश करने का नजरिया 3 महीने से ज्यादा लेकिन 1 साल तक हो उनके लिए यह फंड है। शॉर्ट टर्म फंड में फंड मैनेजर निवेशकों का पैसा मनी मार्केट, टी बिल्स, कमर्शियल पेपर, गिल्ट, बॉन्ड आदि मे लगाता है।


3) डायनॅमिक बॉण्ड फंड :-

इस फंड मे फंड मॅनेजर विविध अवधी मे परिपक्व होने वाली प्रतिभूतीयो मे निवेश करते है। बदलते ब्याज दर के कारण इसका पोर्टफोलियो भी बदलता है, और परिपक्वता अवधि में भी बदल होता है।


4) लिक्वीड फंड :-

बचत खाते में पैसा रखे तो कम ब्याज मिलता। लिक्विड फंड में निवेश करने से उसकी परिपक्वता अवधि कम होने के कारण कुछ महीने पैसे रखकर बचत खाते से ज्यादा ब्याज मिलता है! जिन निवेशकों को अपना पैसा debt fund में तीन महीने के लिए लगाना है, वह इस में निवेश कर सकते हैं! लिक्विड फंड अपना पैसा मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट, कमर्शियल पेपर में लगाते है!


5) गिल्ट फंड :-

गिल्ट फंड का निवेश भारत सरकार, राज्य सरकार तथा भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी प्रतिभूति में ही किया जाता है! इस वजह से इस फंड का जोखिम शुन्य होता है! यह फंड कर मुक्त है, तथा जब चाहे तब राशि मिल सकती है, और साथ में इसकी जोखिम भी शून्य है। इस वजह से बाकी फंड के तुलना में इसका लाभ भी कम है।


6) इनकम फंड :-

1 साल से ज्यादा लंबी अवधि के परिपक्वता अवधि वाले डेब्ट फंड इन्स्ट्रुमेंट्स मे इस फंड का निवेश किया जाता है। जिनका लक्ष्य काल एक साल से ज्यादा है वह इस फंड में निवेश कर सकते हैं।


7) मनी मार्केट फंड :- 

यह एक डेब्ट प्रतिभूतियों में निवेश होने वाला फंड है। इस फंड में हमें एक फिक्स इनकम मिलता है। जब ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव आता है, तब यह फंड कार्य करते हैं। इस वजह से इन्हें लिक्विड फंड भी कह  सकते हैं। इसमें भी कम अवधि के लिए पैसे लगाए जाते हैं, और यह पैसा फिक्स  इनकम इंस्ट्रूमेंट में लगता है।

इसके अलावा भी डेब्ट फंड के कई प्रकार है।

जैसे कॉरपोरेट बॉन्ड फंड, 

क्रेडिट रिस्क फंड,

बैंकिंग एंड पीएसयू फंड।

लोंग ड्यूरेशन डेब्ट फंड!


"डेब्ट म्यूचुअल फंड के फायदे"



हमने देखा कि डेब्ट म्यूचुअल फंड अपना पैसा सरकारी कंपनियां, कॉर्पोरेट बॉन्ड, सरकारी बॉन्ड इन जैसे फिक्स इनकम सिक्योरिटी में लगाते हैं।

इसलिए इक्विटी म्यूचुअल फंड की तुलना में हमें डेब्ट म्यूचुअल फंड में थोड़ा मुनाफा कम मिलता है। लेकिन रिस्क भी कम होता है। साधारण ता डेब्ट म्यूचुअल फंड में 7 से 12 परसेंट तक रिटर्न मिलते हैं। मार्केट के उतार-चढ़ाव में हम डेब्ट फंड का पैसा कभी भी निकाल सकते हैं, और उस पर हमें फिक्स रिटर्न ही मिलेगा। लेकिन इक्विटी फंड में ऐसा नहीं होता है। हो सकता है हमारा पोर्टफोलियो मार्केट के मंदी के दौर में लॉस में चला जाए। बैंक के फिक्स डिपाजिट की तुलना में डेब्ट फंड में थोड़ा रिटर्न ज्यादा मिलता है, लेकिन हम देखते हैं कि फिक्स डिपॉजिट में पैसा निर्धारित समय के लिए लॉक करना पड़ता है। लेकिन डेब्ट फंड में हम यह पैसा कभी भी निकाल सकते हैं।


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