टेक्निकल एनालिसिस क्या है
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स्टॉक मार्केट मे जब भी निवेशक को किसी शेयर मे निवेश करना होता है तब वह उस शेयर के बारे मे अच्छे से जाणकारी प्राप्त करता है। कौनसा शेयर भविष्य मे अच्छा प्रदर्शन करेंगा यह हम technical analysis और fundamental analysis से जान सकते है। तो आज हम टेक्निकल एनालिसिस के बारे मे जानकारी लेंगे।
जिस तरह फंडामेंटल एनालिसिस में हम कंपनी की बैलेंस शीट, प्रॉफिट एंड लॉस देखते हैं; उसी तरह टेक्निकल एनालिसिस में किसी भी शेयर के चार्ट द्वारा शेयर का मूल्य ऊपर जाएगा या नीचे जाएगा इसका पता लगा सकते हैं। इसमें हम अलग-अलग कैंडल स्टिक पैटर्न, चार्ट पैटर्न, इंडिकेटर के द्वारा प्राइस एक्शन का पता लगा सकते हैं।
What is Technical Analysis?
( तकनीकी विश्लेषण क्या है?)
- टेक्निकल एनालिसिस एक ऐसा मूल्य विश्लेषण है जिसमें भूत कालीन प्राइस एक्शन द्वारा भविष्य का प्राइस ट्रेंड पता कर सकते हैं।
जिस तरह बाइक में कम पेट्रोल बाइक बंद होने का संकेत देता है, उसी तरह इंजन ऑयल का कम होना इंजन को गर्म करता है। यह एक तरह के इंडिकेटर होते है। जब हम बाइक चलाते हैं और टायर में कम हवा होगी तो बाइक हिलेगी इसका पता हमें चलता है क्योंकि भूतकाल में भी हमारे साथ ऐसा हुआ होता है। इसी प्रकार टेक्निकल एनालिसिस में भी इसी प्रकार का कार्य होता है। हिस्टॉरिकल डाटा (historical data) के आधार पर हम भविष्य के प्राइस मोमेंट का पता लगाते हैं।
मार्केट एक ट्रेंड के साथ चलता है; और जब तक बाहरी कारक उसे प्रभावित नहीं करें वह अपने पैटर्न और ट्रेंड को प्राइस के साथ दोहराता है। क्योंकि शेयरों की कीमत सप्लाई और डिमांड पर आधारित होती है।
हर बार तकनीकी विश्लेषण सही नहीं हो सकता है। किसी परिस्थिति में तकनीकी विश्लेषण का पूर्वानुमान गलत भी हो सकता है। जब मार्केट में बड़ी उथल-पुथल होती है तब तकनीकी विश्लेषण काम नहीं करता।
टेक्निकल एनालिसिस में चार्ट का महत्व
(Importance of Chart)
शेयर की कीमत में जो उतार-चढ़ाव होता है उसके द्वारा तरह-तरह की कैंडल बनती है और एक चार्ट प्रदर्शित होता है। चार्ट बनाने के कई तरीके हैं इसमें हम कैंडलेस्टिक पेटर्न (Candlestick pattern), हेकेन आशी (heikin Ashi), लाइन चार्ट (Line), बार चार्ट (bar) बनाते हैं और उनके द्वारा प्राइस के ट्रेंड का अनुमान लगाते हैं।
टेक्निकल एनालिसिस मे ज्यादातर कैंडल स्टिक पेटर्न का ही उपयोग होता है। इनके द्वारा हम अपवर्ड ट्रेंड, डाउनवर्ड ट्रेंड और साइडवेज मार्केट का अनुमान लगाते हैं। चार्ट में जो विविध पैटर्न बनते हैं उनके द्वारा कौन से प्राइस से शेयर ऊपर जाएगा और नीचे जाएगा इसका संभावित अनुमान लगा सकते हैं।
टेक्निकल एनालिसिस के टूल्स
(Technical analysis tools)
- प्राइज एक्शन (Price Action) का पता लगाने के लिए टेक्निकल एनालिसिस में ऐसे बहुत सारे टूल्स है जिस का इस्तेमाल होता है, वह निम्नवत है।
1) सपोर्ट एंड रेसिस्टेंस (Support & Resistance)
सपोर्ट और रेसिस्टेंट वह लेवल होती है जहां से किसी भी शेयर की कीमत ऊपर और नीचे जाएगी इसका अनुमान लगता है। और जब इस लेवल पर कोई कैंडलेस्टिक पैटर्न बनती है तब ट्रेंड का कन्फर्मेशन मिलता है।
A) सपोर्ट (Support)
जब मार्केट में डाउन ट्रेंड आता है तब किसी भी शेयर की प्राइस लगातार नीचे नीचे गिरती है और एक ऐसे लेवल तक आकर रुक जाती है और वहां पर एक रेंज बनाती है। उसे ही हम सपोर्ट कहते हैं। यह जो सपोर्ट की रेंज होती है वह भूतकाल में भी बनी होती है।
B) रेसिस्टेंस (Resistence)
मार्केट में जब तेजी का दौर होता है तब शेयर की प्राइस लगातार बढ़ती जाती है और एक ऐसे लेवल तक जाकर रुक जाती है जिसे तोड़ पाना लगभग नामुमकिन होता है। उसे ही हम रेसिस्टेंट कहते हैं।
2) कैंडल स्टिक पैटर्न
कई तरह के कैंडल स्टिक पैटर्न होते हैं। इसमें कुछ कैंडल तेजी का संकेत देते हैं। जैसे ड्रैगनफ्लाई डोजी (Dragonfly doji), हैमर (hammer), बुलिश हरामि (bullish harami), बुलिश मरूबोझू (marubozu)!
उसी तरह कुछ कैंडल मंदी का या डाउन ट्रेन का संकेत देते हैं! - जैसे हैंगिंग मैन (hanging man), ग्रेवस्टोन दोजी (gravestone doji), बेयरिश मरूबोझू bearish marubozu)!
3) चार्ट पैटर्न (Chart Pattern)
टेक्निकल एनालिसिस में कई तरह के चार्ट पैटर्न द्वारा मार्केट ट्रेंड का पता लगाते हैं।
- इसमें बीयरीश फ्लैग और बुलिश फ्लैग द्वारा प्राइस ऊपर जाएगा या नीचे जाएगा यह ब्रेकआउट और ब्रेकडाउन के बाद कन्फर्म होता है।
- उसी तरह चार्ट में एक कप विद हैंडल पैटर्न बनता है जब इसका ब्रेकआउट होता है तब बुलिश सिग्नल मिलता है।
चार्ट में डबल टॉप, डबल बॉटम, बुलिश और बेयरिश चैनल ऐसे पैटर्न के द्वारा हम किसी भी शेयर की प्राइस ऊपर जाएगी या नीचे जाएगी इसका अंदाजा लगाते हैं।
4) इंडिकेटर्स (Indicators)
टेक्निकल एनालिसिस में बहुत सारे लोग अलग-अलग तरह के इंडिकेटर्स का उपयोग करते हैं। कुछ तो कस्टम इंडिकेटर भी बनाते हैं। यह जो इंडिकेटर्स होते हैं वह प्राइस के साथ चलते हैं।
A) वॉल्यूम Volume
- इसमें हम कौनसे प्राइस पर शेयर में खरीदारी और बिकवाली हो रही है इसका पता लगाते हैं। वॉल्यूम एक ऐसा इंडिकेटर है जो ट्रेंड का कन्फर्मेशन देता है। क्योंकि मार्केट डिमांड और सप्लाई पर ही चलता है, और डिमांड और सप्लाई वॉल्यूम पर ही पता चलती है।
B) मूविंग एवरेज (Moving Average)
इसमें हम कोई स्टॉक 5 दिन में, 1 महीने, 100 दिन, 200 दिन में कैसे चल रहा इसका पता लगाते हैं। जब स्टॉक 200 दिन के मूविंग एवरेज के ऊपर होता है तो वह बुलिश सिग्नल देता है।
उसी तरह मूविंग एवरेज के क्रॉसओवर से तेजी और मंदी का संकेत मिलता है।
C) इसी तरह RSI, MACD, VWAP, Stochastic ऐसे कई सारे इंडिकेटर होते हैं।
आगे हम इन सब को विस्तार से पढ़ेंगे टेक्निकल एनालिसिस में इन सब का बहुत महत्व है; और यह पैटर्न सालों से चलते आ रहे हैं इसलिए इसकी अचूकता भी है!


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