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Saturday, October 3, 2020

Types of mutual fund

"म्यूचुअल फंड के प्रकार"


आज हम जानेंगे म्यूचुअल फंड के कौन-कौन से प्रकार है! किस किस आधार पर म्यूच्यूअल फंड का वर्गीकरण किया गया है; जैसे उसके उद्देश्य के आधार पर, उसके स्ट्रक्चर के आधार पर, तथा डायरेक्ट-रेगुलर फंड, ग्रोथ फंड, डिविडेंड फंड, इत्यादि. 

तो हम जानेंगे निवेशक के निवेश के उद्देश्य के आधार पर कौन-कौन से म्यूच्यूअल फंड में हम निवेश कर सकते हैं; तो निवेशको का सर्वाधिक लंबी अवधि का पसंदीदा म्यूच्यूअल फंड का पहला प्रकार है इक्विटी फंड!


"निवेश के जोखिम के आधार पर प्रकार"

✓) इक्विटी फंड (Equity fund)


शेयर
मार्केट में जितना ज्यादा रिस्क उतना ज्यादा मुनाफा होता है! उसी तरह म्यूचल फंड में भी इक्विटी फंड ऐसा फंड है जिसमें निवेशकों का पैसा (90%+) शेयरों में लगता है; जिन निवेशकों को लंबी अवधि में अच्छा मुनाफा चाहिए होता है वह उचित समय में इन इक्विटी फंड में ही पैसा लगाते हैं!

 इक्विटी फंड पर शेयर मार्केट का सीधा असर दिखता है क्योंकि इक्विटी फंड का पैसा शेयरों में ही लगता ह, इसीलिए जब भी निवेशकों को इक्विटी फंड में पैसा लगाना होगा तो जब शेयर बाजार बहुत नीचे गिरेगा तो निवेशकों ने इक्विटी फंड में पैसा लगाना  जरूरी है यानी लंबी अवधि में हमें अच्छा खासा उस पर मुनाफा मिलेगा!

 इक्विटी फंड के कैपिटल के आधार पर इसके स्मॉल कैप, मिड कैप और लार्ज कैप ऐसे प्रकार होते हैं! (Smallcap, Midcap, Largecap)

 एक बात याद रखें अगर निवेशक 1 साल के अंदर फंड से बाहर निकल लेगा तो उसे एक परसेंट एग्जिट लोड (1% exit load) देना होगा !


✓) बैलेंस फंड/हाइब्रिड फंड


जिस फंड में शेयर मार्केट इक्विटी तथा सरकारी बॉन्ड, सरकारी प्रतिभूतियों में संतुलित निवेश किया जाता है उसे ही बैलेंस फंड (hybrid fund) कहते हैं! फंड के जोखिम केेेे अनुसार पैसों को इक्विटी और बॉन्ड में एक अनुपात में लगाया जाता है!इससे निवेशकों की बाजार सेे जुड़ी जोखिम कम हो जाती है!

 Aggressive, Balanced, Conservative ऐसे हाइब्रिड फंड के प्रकार होतेे हैं! 


✓) Debt Fund


इस तरह के म्यूच्यूअल फंड में फिक्स्ड इनकम सिक्योरिटी (fixed income security) के लिए निवेश किया जाता है, जैसे सरकारी बॉन्ड (govt. Bond),  कॉरपोरेट बॉन्ड.

 सरकारी बॉन्ड में निवेश की वजह से इसमें रिस्क नहीं रहता तथा इन फंड की परिपक्वता अवधि पहले से ही निश्चित रहती है! इनके short duration, long duration debt fund, dynamic bond fund, corporate bond fund, liquid fund ऐसे अनेक प्रकार है!

यह भी पढ़ें:- MUTUAL FUND


"स्ट्रक्चर (structure) के आधार पर दो प्रकार"


1) ओपन एंडेड फंड (Open Ended Fund)

ओपन एंडेड स्कीम वह फंड होता है जिसमें कोई समयावधि नहीं होती है! निवेशक कभी भी इस फंड में निवेश कर सकता है; जब ओपन एंडेड फंड का न्यू फंड ऑफर (NFO) आता है तो उसका एक यूनिट का फेस वैल्यू ₹10 होता है! बाद में कुछ समयावधि बाद निवेशक को इस फंड में निवेश करना होगा तो वह वर्तमान चल रहे नेट ऐसेट वैल्यू (NAV) पर यूनिट खरीद सकता है! इस स्कीम को जब तक फंड मैनेजर या कोई भी रेगुलेशन बंद नहीं करती तब तक यह फंड चलते रहता है!

2) क्लोज एंडेड फंड (Closed Ended fund) 

क्लोज एंडेड फंड वह फंड होता है जिसका समय अवधि निश्चित होता है! जब कोई भी न्यू इनिशियल फंड ऑफर आता है तो उसी के साथ वह कितने समय तक रहेगा यह निश्चित होता है!

जब कोई न्यू फंड ऑफर आता है तभी हम क्लोज एंडेड फंड में निवेश कर सकते हैं; और इसका समय अवधि 3 से 5 साल का निर्धारित रहता है!हालांकि इसमें निवेशकों को बीच में फंड से निकलने के लिए एग्जिट रूट होता है!


"फंड के मुनाफे के तीन विकल्प"


1) ग्रोथ फंड (Growth Fund)

जब कोई भी निवेशक ग्रोथ फंड का विकल्प चुनता है तब समय के साथ उस फंडका मूल्य बढ़ता है! जब निवेशक उस फंड के यूनिट को बेचना चाहेगा तो वह बाजार मूल्य पर बेची जाएगी; इस तरह ग्रोथ फंड में नेट ऐसेट वैल्यू के मूल्य पर हमारा मुनाफा निर्धारित होता है!


2) डिविडेंड विकल्प (Dividend)

डिविडेंड विकल्पों में म्यूच्यूअल फंड मैनेजर अपने निवेशकों को मुनाफे के तौर पर समय-समय पर डिविडेंड देते हैं! यह विकल्प उन निवेशकों के लिए अच्छा है जिन्हें समय पर पैसों की आवश्यकता होती है; इस तरह डिविडेंड के रूप में निवेशक लाभ प्राप्त करते हैं!


3) लाभांश पुनर्निवेश विकल्प (dividend reinvestment option)

इस विकल्पों में निवेशक को जो लाभांश प्राप्त होता है वह उन्हें फिर से फंड के यूनिट खरीदने में लगाते हैं! इस तरह लाभांश से यूनिट खरीद कर यूनिट की संख्या बढ़ाते हैं!


"निवेश के माध्यम के आधार पर"

यहां पर निवेश का माध्यम का मतलब हम खुद से उस फंड में निवेश कर रहे हैं कि किसी ब्रोकर के माध्यम से, उस हिसाब से डायरेक्ट फंड और रेगुलर फंड ऐसे दो प्रकार आते हैं!


1) डायरेक्ट फंड (Direct Fund)

इस फंड में निवेशक बिना किसी मध्यस्था के किसी भी म्यूचुअल फंड में निवेश कर सकता है! इससे निवेशकों को कोई कमीशन देना नहीं पड़ता, इस वजह से इसका फायदा दीर्घकाल में दिखता है!


2) रेगुलर फंड (Regular Fund)

इस फंड में निवेश करने के लिए निवेशक किसी अभिकर्ता, मध्यस्था की सहायता लेता है! इस वजह से म्यूच्यूअल फंड कंपनी को इनमें कमीशन देना पड़ता है; और फंड का एक्सपेंस रेशों (Expense Ratio) बढ़ने के कारण म्यूचुअल फंड में डायरेक्ट फंड के तुलना में इसमें कम मुनाफा मिलता है!


इस तरह म्यूच्यूअल फंड के अलग-अलग प्रकार है; और हम विविध माध्यम से इनमें निवेश कर सकते हैं! वर्तमान में कोई कोई कंपनियां डायरेक्ट म्यूच्यूअल फंड का विकल्प उपलब्ध करा रही है, इस वजह से किसी भी म्यूच्यूअल फंड का एक्सपेंस रेशों कम होगा; जितना फंड का एक्सपेंस रेशों काम रहेगा उतना निवेशकों को मुनाफा अच्छा मिलेगा!



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