क्यो होते है Share Price उपर नीचे?
हम हर दिन शेयर बाजार में देखते हैं कि रोजाना शेयर की कीमतों में उतार चढ़ाव होता है। ऐसे कई कारण होते हैं जो मार्केट में हर एक शेयर की कीमतों को प्रभावित करते हैं। बाजार की दैनिक मांग और आपूर्ति तथा किसी भी शेयर से संबंधित न्यूज़, इन जैसे कारक मुख्यता कारणीभूत होते हैं। कुछ ऐसे कारक होते है जो supply और demand को प्रभावित करते है, उस वजह से price मे तेजी या मंदी दीखती है।
तो आज हम इन सब की विश्लेषणात्मक जानकारी हासिल करेंगे
Read :- What is Share market
"शेयर की कीमतों में उतार चढ़ाव को प्रभावित करने वाले कारक"
मांग और आपूर्ति (Demand & Supply):-
शेयर को खरीदने के लिये कितने निवेशक रुची दिखाते है उसपर शेयर की मांग निर्धारित होती है। और मांग ज्यादा रही तो किंमत मे भी चढाव देखने को मिलेंगा। किसी शेयर के खरीदारी के प्रति निवेशक का रुझान अच्छा नहीं होगा तो शेयर की कीमत धीरे-धीरे नीचे चले जाएगी, क्योंकि शेयर को बेचने वाले निवेशक ज्यादा हो गए और खरीदार नहीं के बराबर।
1 दिन में एक शेयर में हजारों, लाखों खरीददार और बेचने वाले उपलब्ध होते हैं।
उदाहरण :- हमने अपने दैनंदिन जीवन में भी देखा होगा जब हम मार्केट में जाते हैं तब किसी वस्तु की मात्रा कम हो और मांग ज्यादा हो तो उसकी कीमत बढ़ जाएगी, उससे ही उल्टा वस्तु बड़ी मात्रा में उपलब्ध होगा तो उसकी कीमत कम हो जाएगी।
शेयर बाजार में भी मांग और आपूर्ति पर शेयर की कीमत का निर्धारण होता है। मांग और आपूर्ति को प्रभावित करने वाले अलग-अलग घटक होते हैं और वह भी शेयर के मूल्य को निर्धारित करते हैं।
>> तो अब हम देखेंगे शेयर की मांग और आपूर्ति को निर्धारित करने वाले ऐसे कौन से घटक है।
2) ✓ :- जब संस्थागत निवेशक, विदेशी निवेशक, mutual fund किसी शेयर मे निवेश करते है तब market sentiments उस stock के प्रती सकारात्मक होता है।
3) ✓ :- शेयर buyback, dividend, bonus, spilt के वजह से भी शेयर के मूल्य मे उतार-चढाव दिखता है।
4) ✓ :- जब कोई ब्रोकरेज कंपनी या एनालिस्ट, रेटिंग एजेंसी किसी कंपनी को upgrade या downgrade करती है तब भी शेयर के मूल्य मे उतार चढाव दीखता है।
"कंपनी के फंडामेंटल"
लंबी अवधि में किसी भी शेयर के मूल्य में वृद्धि उसके अच्छे फंडामेंटल के कारण होती है। जिस कंपनी का अर्निंग रेट (Earning Rate) अच्छा हो, त्रैमासिक, वार्षिक कंपनी अच्छा मुनाफा कमा रही हो, और प्रति शेयर अर्निंग भी अच्छी है, वह कंपनी के शेयर में वृद्धि देखने को मिलती है।
उससे ही विपरीत कोई कंपनी हर साल (Loss) हानी दिखाती है, उसके फंडामेंटल अच्छे नहीं है, वह कंपनी के मांग में कमतरता आएगी और कंपनी की वैल्यू दिन-ब-दिन कम हो जाएगी।
कंपनी की मार्केट में स्थिति कैसी है, उनके प्रोडक्ट की बाजार में कितनी मांग है, उस पर भी मूल्य निर्धारित होता है। तथा मैनेजमेंट कैसा है यह भी जरूरी होता है।
"टेक्निकल एनालिसिस"
जिस तरह से लंबी अवधि में हम कंपनी के फंडामेंटल से उसके स्थिति के बारे में पता कर सकते हैं, उसी तरह शॉर्ट टर्म में हम तकनीकी दृष्टि से शेयर के मूल्य में वृद्धि होगी या गिरावट होगी यह जान सकते हैं। इसमें हम शेयर ने भूतकाल में कैसा परफॉर्मेंस किया, कौन से प्राइस से शेयर की कीमत में बड़ी मात्रा में उतार और चढ़ाव दिखा, उसके चार्ट, पेटर्न, वॉल्यूम इनसे अल्पकाल की मांग और आपूर्ति निर्धारित होती है।
पास्ट परफॉर्मेंस के प्राइस एक्शन के अनुसार हम आने वाले दिनों में शेयर कैसे चाल चलेगा यह हम जान सकते हैं।
शेयर के कौन सी कीमत पर बड़ी मात्रा में डिलीवरी हो रही है उससे हम वृद्धि का अंदाजा लगा सकते हैं।
और इसमें ही बहुत सारे टेक्निकल इंडिकेटर भी होते हैं जो हमें भविष्य के शेयर की कीमत का निर्धारण करने में मदद करते हैं। जैसे मूविंग एवरेज (Moving Average), (RSI) आरएसआई, (MACD) एमएसीडी!
"मार्केट सेंटीमेंट्स"
इसमें ट्रेडर और निवेशक किसी शेयर के प्रति खरीददारी और बेचने के लिए कितना तत्पर है, तथा एखाद शेयर की कीमत बहुत मात्रा में गिर गई है तो निवेशक बेचेगा या और खरीदारी करेगा इस पर भी मार्केट सेंटीमेंट्स निर्धारित होते हैं। और उससे उस शेयर की कीमत में उतार और चढ़ाव आता है।
"सरकारी नीतियां और वैश्विक कारक"
सरकार समय-समय पर औद्योगिक नीतियां लाते है। सरकार की कर निर्धारण नीति, बाजार के प्रति सरकार की नीति, इन जैसे कारक भी अल्पकाल में शेयर की कीमत का निर्धारण करते हैं।
स्थिर सरकार बाजार के लिए अनुकूल होती है। रिजर्व बैंक की पॉलिसी इन जैसे कारक भी प्रभावित करते हैं।


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