डिलीवरी ट्रेडिंग क्या है?
शेयर मार्केट मे बहुत से निवेशक जुड रहे है। और जो नये निवेशक होते है उन्हे शेयर कैसे खरीदी और बिक्री करते है उसकी कम जानकारी होती है। तो आज हम डिलिव्हरी ट्रेडिंग (delivery trading) क्या होती है यह जानेंगे।
शेयर मार्केट मे दो प्रकार के लोग होते है,
एक जो जिस दिन शेयर की खरीदी होती है उसी दिन बेच दिया जाता है उसे हम इंट्राडे ट्रेडिंग कहते है। और जो लोग यह क्रिया करते है उन्हे मार्केट की भाषा मे ट्रेडर्स कहते है।
दुसरा किसी भी शेयर को आज खरीदी करके भविष्य मे कभी भी बेच सकते है। इस प्रकार की क्रिया जो करते है उन्हे इन्व्हेस्टर्स (निवेशक) कहते है!
डिलीवरी ट्रेडिंग क्या है?
(What is Delivery Trading)
- जब हम किसी शेयर को आज खरीद कर उसे 1 दिन से ज्यादा समय के लिए रखते हैं, तो उस शेयर की खरीद को हम डिलीवरी ट्रेडिंग कहते हैं।
जब हम किसी भी शेयर को खरीदते हैं तब वह दिन और उसके बाद के 2 दिन (T+2days) के बाद शेयर हमारे डीमैट अकाउंट में आ जाता है। एक बार डीमेट में शेयर आ गया तब हम उसे जब चाहे तब बेच सकते हैं।
डिलीवरी ट्रेडिंग के दो प्रकार
1) शॉर्ट टर्म :-
जब हम किसी शेयर को आज खरीद कर उसे पांच-छह महीने बाद बेच देते हैं, उसे अल्पकालीन या शार्ट टर्म डिलीवरी कहते हैं।
2) लॉन्ग टर्म :-
जब किसी शेयर को हम 6 महीने से 1 साल से ज्यादा रखते हैं उसे हम दीर्घकालीन या लॉन्ग टर्म डिलीवरी ट्रेडिंग कहते हैं।
इंट्राडे ट्रेडिंग और डिलीवरी ट्रेडिंग में अंतर
- (1) इंट्राडे ट्रेडिंग में शेयर को जिस दिन खरीदा उसी दिन बेच सकते हैं। तो डिलीवरी ट्रेडिंग में आज खरीद कर कभी भी बेच सकते हैं। ऐसा जरूरी नहीं आज ही बेचना है।
(2) इंट्राडे ट्रेडिंग में ब्रोकर हमें मार्जिन देता है। कम पैसे में हम ज्यादा शेयर खरीद सकते हैं। लेकिन डिलीवरी ट्रेडिंग में जितने मूल्य का शेयर खरीदना है उतना पैसा हमें ब्रोकर को देना होगा।
(3) इंट्राडे ट्रेडिंग में उच्च जोखिम उच्च मुनाफा होता है। तो डिलीवरी ट्रेडिंग में जोखिम कम है और मुनाफा भी कम है। क्योंकि हमारे पास लगाने के लिए पैसा भी कम है।
(4) इंट्राडे ट्रेडिंग में हम जो खरीदी बिक्री करते हैं वह प्रॉफिट और लॉस तक ही सीमित है। लेकिन डिलीवरी ट्रेडिंग में हम जो शेयर खरीदते हैं उस पर हमें डिविडेंड मिलता है। हो सकता है बोनस भी मिल जाए।
शेयर खरीद में डिलीवरी ट्रेडिंग के शुल्क
1) brokerage ( कोई ब्रोकर फ्री डिलीवरी ट्रेडिंग देता है)
2) Security transiction charge ( जब हम सेल करेंगे तब लगेगा, खरीदारी के वक्त नहीं लगता)
3) GST 18% brokerage पर
4) Exchange transiction charge
5) Sebi turnover fees
6) Stamp duty
इन प्रकार के चार्जेस डिलीवरी ट्रेडिंग में लगते हैं। जो शेयर हमारे डिमैट अकाउंट में होता है जब हम उसे बेचते हैं तब डीपी हैंडलिंग चार्जेस ₹20 से ₹23 के बीच देना पड़ता है।
डिलीवरी ट्रेडिंग के फायदे
(1) आज शेयर खरीदी करो और कभी भी बेचो यानी जब मुनाफा होगा तब बेचेंगे।
(2) हमारे पास जो शेयर होते हैं उस पर हमें बोनस और डिविडेंड भी मिलेगा।
(3) इसमें हम जोखिम को कम कर सकते हैं। और दीर्घावधि में अच्छा मुनाफा हासिल कर सकते हैं।
(4) नया निवेशक भी एक-दो शेयर खरीदकर निवेश की शुरुआत कर सकता है।
(5) कुछ बैंक शेयर पर ऋण सुविधा भी देते हैं।
निष्कर्ष
इंट्राडे ट्रेडिंग और डिलीवरी ट्रेडिंग दोनों के अपने-अपने फायदे हैं और अपने अपने नुकसान है। डिलीवरी ट्रेडिंग में शेयर खरीदने के लिए हमें किसी भी कंपनी के फंडामेंटल के बारे में जानना जरूरी होगा। किसी शेयर को कम दाम पर खरीद कर उसे कुछ समय रखकर हम बैंक से ज्यादा मुनाफा कमा सकते हैं।
अंततः कोई भी निवेश जोखिम भरा होता है, इसीलिए सोच समझकर निवेश करना चाहिए।

No comments:
Post a Comment