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Monday, September 28, 2020

How to deactivate demat account

 "डीमैट अकाउंट कैसे बंद करें"



क्या आपके पास भी डिमैट अकाउंट है और उसका कोई उपयोग नहीं हो रहा है ना ही उसमें कोई शेयर है और आप फिजूल का Annual maintenance charge दे रहे हैं,

तो आज हम जानेंगे डिमैट अकाउंट को कैसे बंद करते हैं!

सबसे पहले तो यह जानेगे Demat Account होता क्या है,

 


 जिस तरह बैंक का सेविंग अकाउंट होता है और उसमें हम पैसे सुरक्षित रखते हैं उसी तरह डिमैट अकाउंट वह खाता है जिसमें हम अपने शेयर, म्यूच्यूअल फंड के यूनिट, बॉन्ड इत्यादि निवेश सुरक्षित रख सकते हैं! डिमैट अकाउंट बैंक से लिंक होता है उसी के माध्यम से हम पैसों का लेन देन करते हैं और उन पैसों से शेयर खरीदते हैं!

Demat account opening 👈

What is demat account  👈


"डिमैट अकाउंट बंद करने की प्रक्रिया"

कोई कोई ब्रोकर डिमैट अकाउंट बंद करने की जगह अकाउंट इन एक्टिव का ऑप्शन देते हैं इसमें यह होता है कि हम डीमेट अकाउंट demat account तो बंद नहीं करते लेकिन वह टेंपरेरी क्लोज कर देते हैं, इस वजह से हमें जितना टाइम तक वह बंद रहेगा उसका AMC नहीं लगता, जब हम फिर से एक्टिव करेंगे तो फिर उस साल के लिए AMC (Annual maintenance charge) लगेगा


ऐसे बंद करें डिमैट अकाउंट

ऑनलाइन अकाउंट क्लोजर वर्तमान में available नहीं है, हमें किसी भी ब्रोकर या जहां पर हमने डिमैट अकाउंट चालू कराया था उनसे संपर्क करके या उन्हें ईमेल के जरिए बताइए कि हमें डीमैट अकाउंट बंद कराना है! फिर वह आपको एक अकाउंट क्लोजर फॉर्म (account closure form) देंगे उस पर आपका डीपी आईडी (DP ID) पहले से ही होगा!  हमें अकाउंट क्लोजर फॉर्म भर के ही उसे उनके कॉरस्पॉडेंस ऐड्रेस पर भेजना होगा,


फॉर्म भरने से पहले इन बातों को ध्यान में रखें

★ अकाउंट में जो कोई भी शेयर है उन्हें बेचे या दूसरे Demat में ट्रांसफर करें!

★ जो कोई भी बचा बैलेंस है उसे बैंक में ट्रांसफर करें,

★ और तीसरी बात कोई भी नेगेटिव बैलेंस नहीं होना चाहिए.


फॉर्म को कैसे भरे

 Account closure form उनके साइट से डाउनलोड करें और उसका प्रिंट ले! उसके बाद उसमें आपका डीपी आईडी पहले से ही होगा अब क्लाइंट आईडी, डेट, नाम और बाकी जानकारी भरिए! Acknowledgment receipt नहीं भरना है!

इस तरह आवश्यक जानकारी भरने के बाद हमें वह फॉर्म अपने ब्रोकर फर्म के आधिकारिक ऑफिस में भेजना है! हर एक ब्रोकर का अपना-अपना करेस्पॉन्ड्स एड्रेस अकाउंट क्लोजर फॉर्म पर दिया रहता है! फॉर्म के सबमिट होने के पश्चात 10 से 15 दिनों के अंदर हमारा डिमैट अकाउंट बंद हो जाएगा और ब्रोकर के तरफ से हमें ईमेल या एसएमएस के माध्यम से इसकी जानकारी मिलेगी!

Sample account closure form of upstox



यह पढ़े:- selection of right broker | demat account opening

Sunday, September 27, 2020

What is CryptoCurrency ? How to buy & invest and types of crypto currency

 "Cryptocurrency"


हर एक देश की अपनी अपनी करेंसी (Currency) होती है! उसी तरह क्रिप्टोकरेंसी डिजिटल करेंसी है! तो आज हम जानने की कोशिश करेंगे आखिर क्रिप्टो करेंसी (CryptoCurrency) क्या होती है? किस तरह से इसमें भी निवेश करते हैं? और कौन-कौन सी करेंसी इसमें आती है; 

क्रिप्टो करेंसी जिसका कोई भी रंग-रूप, आकार नहीं है, ना ही वह भौतिक रूप से अस्तित्व में है, लेकिन डिजिटल माध्यम से हम इस करेंसी में खरीदी बिक्री कर सकते हैं; और यह सब कुछ ऑनलाइन सिस्टम से होता है ! यानी क्रिप्टो करेंसी यह एक डिजिटल मुद्रा है और यह ब्लॉकचेन (blockchain) के माध्यम से कार्य करती है! क्रिप्टो करंसी कंप्यूटर एल्गोरिथ्म के माध्यम से डिजाइन की जाती हैैैै और इसका कोई भी मालक नहीं होता है; ना ही कोई देश की सरकार इसे संचालित करती है! क्रिप्टो करेंसी के डेवलपर ने इसे इस तरह से विकसित किया है कि यह एकदम गोपनिय, सुरक्षित और इसे कोई भी ट्रेस नहीं कर सकता!  

इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कुछ wallet होते हैं उसमें रखते हैं जैसे XODUS, ELECTRUM, MYCELIUM etc. और WAZIRX, BINANCE इन जैसे ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से इसमें हम इन्वेस्टमेंट INVESTMENT कर सकते हैं! या कोई भी क्रिप्टोकरंसी खरीद सकते हैं! तथा इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कैशलेस (cashless transiction) व्यवहार करने के काम में आता है! भारत में बिटकॉइन जैसे क्रिप्टोकरंसी को सरकारी मान्यता नहीं है!


"क्रिप्टो करेंसी कैसे कार्य करता है"

क्रिप्टो करेंसी कंप्यूटर एल्गोरिदम (Algorithm) के माध्यम से बनी होती है और इसका कोई मालिक नहीं होता है! ब्लॉकचेन के माध्यम से क्रिप्टो करेंसी एक वॉलेट से दूसरे वॉलेट में हस्तांतरित की जाती है! ब्लॉकचेन में सभी वॉलेट की जानकारी और करेंसी गोपनीय रहती है, इस वजह से इस में धोखाधड़ी होने के चांसेस से कम रहते हैं!

"BLOCK CHAIN क्या होता है"



ब्लॉकचेन (BLOCK CHAIN) क्रिप्टो करेंसी खरीदने का वह माध्यम है जिसमें क्रेता और विक्रेता के बीच कोई मध्यस्थ या बिजोलिया नहीं रहता! ब्लॉकचेन एक विस्तृत डाटाबेस है जो हजारों कंप्यूटर पर प्रतिलिपित है, डेटाबेस का हर एक रिकॉर्ड इंक्रिप्टेड (INCRYPTED) होता है! इसीलिए इसमें पूरी गोपनीयता रहती है! ब्लॉकचेन एक पब्लिक लेजर (PUBLIC LEDGER)  रिकॉर्ड की तरह काम करती है!
 बिटकॉइन के माध्यम से ब्लॉकचेन की शुरुआत हुई है, ब्लॉकचेन के द्वारा हमे कोई भी क्रिप्टो करेंसी बिना किसी बिजोलिया के हम wazirX, Binance जैसे ट्रेडिंग एक्सचेंज से खरीद सकतेे है या बेच सकते हैं!


"क्रिप्टो करेंसी के प्रकार"

क्रिप्टो करेंसी एक आभासी करेंसी है, और यह भौतिक रूप से अस्तित्व में नहीं है, इसके निम्नवत प्रकार हैं!

बिटकॉइन BITCOIN (BTC)



क्रिप्टो करेंसी में सबसे जाने-माने वाली और सबसे प्रसिद्ध करंसी बिटकॉइन है!  बिटकॉइन (Bitcoin) का निर्माण सतोषी नाकामोटो (Satoshi Nakamoto) ने किया! क्रिप्टो करेंसी में हर किसी ने आज बिटकॉइन नाम सुना ही होगा! बिटकॉइन एक वर्चुअल करेंसी होने के कारण इसे ऑनलाइन वॉलेट (Online wallet) में रखते हैं इसलिए बड़ी मात्रा में लोग बिटकॉइन में पैसा लगाना चाहते हैं!

क्रिप्टो करेंसी  ट्रेडिंग एक्सचेंज (Trading Exchange) में  सबसे ज्यादा  बिटकॉइन की  खरीदी और बिक्री होती है ! 1 बिटकॉइन कि भारतीय कीमत लगभग 785000 ₹ है! वर्ष 2009 में बिटकॉइन की शुरुआत हुई जब मार्केेेेट में बिटकॉइन नया नया आया था तो कई बिटकॉइन निवेशकों को इसने मालामाल किया!

Etherium (एथेरियम)


Etherium भी ब्लॉकचेन के माध्यम से बनी हुई ओपन सोर्स क्रिप्टो करेंसी है, (Open source crypto currency)

इस करेंसी के दो वर्जन है एक एथेरियम और दूसरा एथेरियम क्लासिक! Vitalik Buterin द्वारा इसकी शुरुआत 2015 में हुई, 1 एथेरियम कि भारतीय कीमत 25500₹ है!

Lite coin (LTC)


Lite Coin Peer-to-peer क्रिप्टो करेंसी है, और यह ओपन सोर्स डाटाबेस open source से बनी हुई है! और इसकी शुरुआत अक्टूबर 2011 में Charlie Lee नामक Google Employee ने की, एक लाइट कॉइन की भारतीय कीमत लगभग 3280 ₹ रुपए हैं!


Ripple (XRP)


distribution open source protocol पर आधारित यह क्रिप्टो करंसी अक्टूबर 2012 में आई है! एक रिपल की भारतीय कीमत ₹18 के करीब है!

Tether (USDT) 


2014 में शुरू हुई यह क्रिप्टो करेंसी ब्लॉकचेन सक्षम प्लेटफार्म आधारित कार्य करती है, क्रिप्टो करेंसी में Tether (usdt) यह चौथी सबसे बड़ी करेंसी है! यह करेंसी स्थिर करेंसी में गिनी जाती है! 1 USDT की कीमत भारतीय 75 ₹ रुपए है!


Binance coin (BNB)


यह क्रिप्टो करेंसी बाइनेंस ट्रेडिंग एक्सचेंज की अधिकारिक मुद्रा है! वर्तमान में बाइनेंस वॉल्यूम (volum) के लिहाज से सबसे बड़ा ट्रेडिंग एक्सचेंज है! बाइनेंस कॉइन का उपयोग ट्रेडिंग फीस के लिए तथा क्रिप्टो करेंसी के एक्सचेंज फीस में उपयोग होता है!


"क्रिप्टो करेंसी के फायदे और नुकसान"

क्रिप्टो करेंसी एक डिजिटल करेंसी होने के कारण उसके फायदे और नुकसान दोनों हैं !

फायदे:-

1) डिजिटल लेनदेन :- 

क्रिप्टो करेंसी भौतिक रूप से अस्तित्व में ना होने के कारण या एक डिजिटल मुद्रा है; और इसी वजह से कोई भी ऑनलाइन ट्रांजैक्शन, पेमेंट या सर्विस लेने के लिए हम बिटकॉइन जैसी या अन्य क्रिप्टो करेंसी का इस्तेमाल कर सकते हैं!


2) किसी भी देश के सरकार का इस पर नियंत्रण नहीं:-

क्रिप्टो करेंसी पर किसी सरकार का नियंत्रण नहीं है इसलिए यह एक open-source डेटाबेस की तरह कार्य करता है! इसलिए इसकी गोपनीयता है और सरकारी हस्तक्षेप का इसमें कोई भी प्रभाव नहीं होगा!

3) पूरी तरह से सुरक्षित:-

ज्यादातर करेंसी ब्लॉकचेन के माध्यम से बनी होती है और ब्लॉकचेन को हैक करना बहुत मुश्किल भरा काम ह; इसीलिए यह करेंसी एकदम गोपनीय रहती है और सुरक्षित रहती है!

नुकसान

1) कोई भौतिक अस्तित्व नहीं है:-

क्रिप्टो करेंसी का कोई भी देश मुद्रण नहीं करता ना ही इसे बैंक से वितरित कर सकते हैं ना ही इसका कोई बैंक अकाउंट होता है


2) सरकार का कोई भी नियंत्रण नहीं :-

क्रिप्टो करेंसी पर किसी भी सरकार का नियंत्रण नहीं होने के कारण इसमें बहुत बड़ी मात्रा में उतार-चढ़ाव pump-n-dump देखने को मिलता है! इसीलिए इसका निवेश बहुत जोखिम भरा हो सकता है!


3) गलत कामों में इस्तेमाल:-

सरकारी नियंत्रण से मुक्त होने के कारण और ओपन सोर्स डाटाबेस के माध्यम से इसे कोई भी ट्रेस नहीं कर सकता, इसलिए इसका उपयोग गलत कामों में होता है; जैसे हत्यारों की खरीदी बिक्री, ड्रक्स, माफिया, स्मगलिंग ऐसे गलत कामों में होता है!

इस तरह आज हमने देखा क्रिप्टोकरंसी क्या है, ब्लॉकचेन क्या है और क्रिप्टो करेंसी के कौन से प्रकार है, वर्तमान में बहुत से निवेशक बिटकॉइन के चलते क्रिप्टो करेंसी में निवेश करना चाहते हैं; बिटकॉइन क्रिप्टो करेंसी की एक प्रसिद्ध करेंसी है!

Saturday, September 26, 2020

Share/Stock Market Related Terms

"शेयर मार्केट में उपयुक्त शब्दावली"



शेयर मार्केट में ऐसे बहुत से तकनीकी शब्द है जिसका अर्थ हमें पता नहीं है तो
आज हम जानेंगे शेयर मार्केट में जो कुछ शब्दों का इस्तेमाल होता है उसका वास्तविक आशय क्या होता है!
 जैसे निफ़्टी, सेंसेक्स, कॉल-पुट, ऑप्शन ट्रेडिंग, फ्यूचर ट्रेडिंग, हेजिंग, लिमिट ऑर्डर, स्टॉप लॉस ऑर्डर etc. तो हम एक-एक करके इन सब तकनीकी शब्दों का विश्लेषण करेंगे!

"शेयर मार्केट"



शेयर मार्केट (share market) वह पूंजी बाजार है जिसमें हम स्टॉक एक्सचेंज (stock exchange) पर लिस्ट हुए किसी भी कंपनी के शेयर खरीद सकते हैं और उसे बेच सकते हैं! यानी कंपनी के शेयर की खरीदी-बिक्री का मार्केट मतलब शेयर मार्केट है!

 "स्टॉक ब्रोकर" (Stock Broker)

ब्रोकर वह व्यक्ति या संस्था है, जो निवेशकों के लिए शेयर खरेदी करता है और बेचता है और उसके बदले में उसे कमीशन मतलब ब्रोकरेज प्राप्त होता है!

"ब्रोकरेज BROKRAGE"

जब कोई निवेशक ब्रोकर के माध्यम से अपने शेयर की खरीदी और बिक्री करता है तो उस पर ब्रोकर जो कमीशन लेता है उसे ही हम ब्रोकरेज कहते हैं!

"Bull & bear market" तेजी-मंदी


स्टॉक मार्केट में तेजी के बाद मंदी और मंदी के बाद तेजी का चक्र हमेशा चलता रहता है!
 तेजी का मतलब जब निवेशक को लगता है कि किसी शेयर की प्राइस (price) भविष्य में ऊपर जा सकती है, उससे निवेशक को मुनाफा होगा!
 मंदी का अर्थ निवेशक को लगता है कि किसी शेयर की कीमत उसके वर्तमान कीमत के और नीचे जाएगी!

"Bid-ask & spread"



Bid:- किसी शेयर को खरीदने के लिए बहुत से buyers buying order आर्डर लगाते हैं, उन सभी का शेयर खरीदने का मैक्सिमम आर्डर प्राइस (maximum order price) को बीड कहते हैं ! 

Ask:- किसी कंपनी के शेयर को बेचने के लिए जब बहुत सारे Selling ऑर्डर लगाते हैं तब सबसे कम जो प्राइस चलेगा उसे आस्क प्राइस (Ask price) कहेंगे!


Spread:- आप और बेड प्राइस के बीच जो फर्क होता है उसे हम स्प्रेड कहते हैं मान लीजिए आज प्राइस ₹50 और बेड प्राइस 52 होगा तो इनके बीच का Difference ₹2 स्प्रेड है!


Intraday:- किसी शेयर को उसके दैनिक उतार-चढ़ाव के बीच खरीद कर उसी दिन बेचना यानी इंट्राडे (Intraday) या डे ट्रेडिंग कहते हैं!

Dividend:- कंपनी के अपने साल भर के व्यापार में जो लाभ अर्जित होता है उस पर टैक्स चुकाने के पश्चात जो लाभ का हिस्सा रहता है उसे शेयरधारकों को भागीदारी के अनुपात में बांटा जाता है उसे ही डिविडेंड कहते हैं!

Index इंडेक्स :- शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव की स्थिति को दर्शाने वाले पैमाने को इंडेक्स कहते हैं! यह बाजार के रुझान को दर्शाता है जैसे निफ़्टी फिफ्टी इंडेक्स, सेंसेक्स!

सेन्सेक्स Sensex:- बॉम्बे स्टॉक एक्स्चेंज (BSE) के संवेदी सूचकांक index को sensex कहते हैं। तीस शेयरों पर आधारित यह सूचकांक बाज़ार  के उतार-चढ़ाव को दर्शाता है

निफ्टी Nifty :- नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) द्वारा जो इंडेक्स जारी किया गया है उसे ही निफ्टी कहते हैं निफ्टी में 50 स्टॉक होते हैं उन स्टॉक से ही निफ्टी का उतार-चढ़ाव का रुझान पता चलता है!

आईपीओ Initial Public Offering:- विस्तृत जानकारी यहां पढ़ें

Multibagger:- मल्टीबैगर स्टॉक वह होते हैं जो अंडरवैल्यूड और फंडामेंटली स्ट्रांग होते हैं और अपने निवेश राशि से कई गुना ज्यादा रिटर्न (Retutn) देते हैं!

Limit order:- लिमिट ऑर्डर को फिक्स प्राइस ऑर्डर भी कहा जाता है, क्योंकि इसमें निवेशक एक तय कीमत पर ही शेयर खरीदी करता है! मान लीजिए SBI ₹300 पर चल रहा है और हमें उसे ₹298 पर खरीदना है तो हम लिमिट ऑर्डर लगाएंगे!

Market Order:- इस टाइप के आर्डर में किसी शेयर की प्राइस Price वर्तमान में जिस कीमत पर है उसी कीमत पर खरीदने के लिए हम मार्केट ऑर्डर market order लगाते हैं! लेकिन मार्केट आर्डर लगाने से हमें उसकी कीमत से थोड़ा ज्यादा या कम रेट Rate में शेयर मिलेगा!

Stop loss Order:- जब किसी निवेशक ने कुछ शेयर खरीद कर रखे हैं, अब वह नुकसान को सीमित करना चाहता हैै तो वह stop loss order का उपयोग करेगा! जैसे SBI के 10 शेयर ₹300 केे भाव से खरीदें और अब वर्तमान में उसकी प्राइस  ₹320 है, मुझे लगता है कीमत और बढ़ेगी लेकिन मार्केट है प्राइस नीचे भी गिर सकता है इसीलिए मैं मेरे शेयर को स्टॉप लॉस आर्डर लगाके ₹315 पर सेट करूंगा यानी मार्केट नीचे भी आएगाा तो मुझे नुकसान नहीं होगा!

Portfolio:- किसी निवेशक का शेयर म्यूच्यूअल फंड इत्यादि का जो टोटल निवेश होता है उसे पोर्टफोलियो कहते हैं!उदाहरण मेरे पास एक्सिस बैंक के 100 शेयर 400 के भाव से है;    एसबीआई 180 के भाव से 10 शेयर है तो मेरा पोर्टफोलियो 41800 ₹ का है!

Demat Account:- 

विस्तृत जानकारी यहां पढ़ें

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Friday, September 25, 2020

The SECRET of SUCCESS in the STOCK MARKET

"शेयर मार्केट में ऐसे मिलेगी सफलता"



आज हम जानेंगे शेयर मार्केट में किस तरह सफलता मिल सकती है!
वर्तमान में बहुत से निवेशकों का रुझान शेयर मार्केट की तरफ हो रहा है; हर कोई शेयर मार्केट क्या है जानने की कोशिश कर रहा है इनमें से बहुत से निवेशक नए होने के कारण उन्हें बाजार की भली-भांति जानकारी नहीं होती है, और वह अपना पैसा एक जुगार की तरह उसमें लगा देते हैं! जिस तरह शेयर में हम लाभ कमा सकते हैं उसी तरह हमारा पैसा डूब भी सकता है; इसीलिए किसी भी शेयर में निवेश करने के पहले हमें उस शेयर के बारे में संपूर्ण फंडामेंटल एनालिसिस और टेक्निकल एनालिसिस के बारे में जानकारी होना आवश्यक है; तो ही हम इसमें लाभ कमा सकते हैं अन्यथा हम अपना पूरा बचत इसमें गवा देंगे!
हमें सफल निवेशक बनने के लिए कुछ बातों को ध्यान में रखना होगा और कुछ नियमों के अनुसार चलना होगा, तो ही हम सफलता हासिल कर सकते हैं, तो देखेंगे क्या है सफलता के मुख्य पहलू !

यह भी पढ़ें :- शेयर मार्केट

नए निवेशक दीर्घकालीन नजरिया रखें:-

आज नए निवेशक जल्दबाजी में पैसा कमाने के चक्कर में इंट्राडे ट्रेडिंग (Intraday Trading) करते हैं और उसमें उन्हें बड़ी मात्रा में नुकसान होता है! 
किसी भी शेयर की जानकारी ना होते हुए शेयर ऊपर जाएगा या नीचे यह अनुमान लगाकर वह ट्रेडिंग करते हैं और हानि हो जाती है;
प्रतिदिन शेयर में उतार चढ़ाव देखने को मिलता है, बाजार में आई अफवाह, गलत जानकारी तथा खबरों के कारण शेयर में गिरावट हो सकती है, इसीलिए अगर हमारा नजरिया दीर्घकालीन होगा तो तो शेयर धीरे-धीरे करके उसके उचित मूल्य पर जाएगा; विश्व के बड़े बड़े निवेशकों ने दीर्घकालीन निवेश से ही मुनाफा हासिल किया है !दीर्घकालीन निवेश में हमें अच्छा मुनाफा हो सकता है, शॉर्ट टर्म (Short Term) मुनाफा हमें लालच दिखाकर असफलता की ओर ले जाता है, अच्छी फंडामेंटल (Fundamental) वाली कंपनियों के शेयर खरीद के हम लंबी अवधि के नजरिए से जरूर लाभ कमाएंगे! तो इंट्राडे ट्रेडिंग में अपना पैसा बर्बाद ना करें, अगर आपको शेयर मार्केट का बहुत लंबा अनुभव हैै तो ही इंट्राडेे ट्रेडिंग में जाए !


एडवाइजरी (Advisory) और टिप्स (Tips) के पीछे ना पड़े 



 आपने डिमैट अकाउंट शुरू किया होगा तो आपको भी एक दिन किसी एडवाइजरी (Advisory) से जरूर कॉल आया होगा और आपको भली-भांति जानकारी होगी कि वह किस तरह से हमें लालच दिखाकर उनसे जुड़ने को कहते हैं!
              आप कोई भी शेयर मार्केट के ग्रुप से जुड़े, आपको टिप्स (Tips) की बौछार मिलेगी ! ए खरीदो वह खरीदो हर समय मैसेज आते रहेंगे, ए स्टॉक (Stock) मल्टीबैगर (multibagger) है, यह स्टॉक 2 महीने में डबल होने वाला है इसे खरीदें ऐसे शब्द आपके कानों पर जरूर आए होगे;
मेरी तो सलाह यही होगी कि आप ऐसे एडवाइजर और टिप्स के पीछे भाग कर अपना पैसा बर्बाद न करें!
दरअसल टिप्स में होता यह है कि ऑपरेटर और सटोरिए एक स्टॉक (stock) को थोड़ा बहुत ऊपर ले जाते हैं और फिर निवेशकों को उसे खरीदने की सलाह देते हैं, और तब तक वह ऑपरेटर लाभ कमा कर बाहर निकलते हैं और आम निवेशक फस जाते हैं और नुकसान हो जाता है!
इसलिए टिप्स के पीछे जाकर अपना पैसा बर्बाद ना करें और उतना ही समय शेयर मार्केट को सीखने में लगाए तो ही हमें भविष्य में उसे जरूर लाभ मिलेगा!

शेयर मार्केट के बारे में जानकारी हासिल करें

 किसी भी शेयर में निवेश करने के पहले हमें उस शेयर के बारे में जानकारी होना आवश्यक है! मार्केट में बहुत से ऐसे टर्म है जिसे सीखा जा सकता है, जैसे टेक्निकल एनालिसिस (Technical Analysis), फंडामेंटल एनालिसिस ( Fundamental Analysis),  हारमोनिक्स पैटर्न (Harmonic pattern) इसे सीख कर हम आसानी से ट्रेडिंग कर सकते हैं!

Technical Analysis:-  

इसमें हम किसी भी शेयर का चार्ट (Chart) देखकर शेयर में किस प्राइस (Price) से शेयर ऊपर बढ़ता है, और कौन से लेवल से शेयर नीचे आता है, मतलब क्या सपोर्ट (Support) है, क्या रेसिस्टेंट (Resistance) है, इस बात का पता चलता है! साथ साथ इसमें हमें कैंडल स्टिक (Candle stick Pattern) के बारे में जानकारी मिलती है, और टेक्निकल एनालिसिस (technical analysis) में बहुत सारे इंडिकेटर (Indicator) होते है, उन के माध्यम से हम किसी भी स्टॉक के उतार-चढ़ाव को जान सकते हैं!

 फंडामेंटल एनालिसिस:-

इसमें हम किसी कंपनी की बैलेंस शीट (Balance sheet) की जांच करेंगे उस कंपनी का सेल्स (Sales) कितना है, इनकम (Income) कितना है, नेट प्रॉफिट (net profit) कितना है उसके बारे में जानकारी हासिल करेंगे! तथा उस कंपनी (company) पर कितना कर्ज (debt) है, पीई रेशों (P.E. Ratio) क्या है, पीएस (EPS) कितना है, इन सब के बारे में फंडामेंटल एनालिसिस में जानकारी मिलती है, अच्छी फंडामेंटल वाली कंपनी आगे चल के अच्छा मुनाफा देती है!

हारमोनिक्स पैटर्न :- 
Fibonacci number के golden Ratio द्वारा इसमे pattern draw करते है!

Thursday, September 24, 2020

WHAT IS INSURANCE AND IT'S DIFFERENT OF TYPES.

 "बीमा और उसके विभिन्न प्रकार"

हमारा भविष्य अनिश्चितकालीन है आगे क्या हो सकता है हमें पता नहीं, और हमेशा हमारे ऊपर आर्थिक जोखिम बनी रहती है! उससे बचने के लिए ही हम बीमा(INSURANCE) निकालते हैं ! 
बीमा वह साधन है जो हमारी भविष्य कालीन आर्थिक जोखिम को दूर करता है, और उसकी जिम्मेदारी किसी दूसरे पक्ष को देता है! मतलब बीमा हमारे लिए एक जोखिम से बचाने वाला सुरक्षा कवच है!
      बीमा किसी कंपनी या संस्था द्वारा निकाला जाता है और वह कंपनी बीमा धारक व्यक्ति और कंपनी के बीच एक कालावधी तक वित्तीय करार करते हैं?
बीमा में बीमा धारक को एक निश्चित कालावधी तक प्रीमियम अदा करने से किसी अनिश्चित दुर्घटना उदाहरण - मृत्यु पश्चात बीमा की जो निर्धारित रकम है वह उसके नॉमिनी को बीमा कंपनी द्वारा मिलती है उससे बीमा धारक के परिवार की आर्थिक सुरक्षा होती है! बीमा के विभिन्न प्रकार है और हर एक बीमा की अपनी अलग अलग पहचान है ,और अलग-अलग लाभ है ! व्यक्ति के जीवन में परिवार को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए बीमा एक महत्वपूर्ण साधन है !

यहां पढ़ें:- Health Insurance

बीमा क्यों महत्वपूर्ण है?



बीमा की खुद की अपनी बहुत सी विशेषताएं हैं इसीलिए आज हर कोई बीमा (INSURANCE) निकलता है !आज चाहे वह दोपहिया वाहन या चार पहिया वाहन हो तथा स्वास्थ्य बीमा, जीवन बीमा इत्यादि बीमा आज निकाले जाते हैं!

आर्थिक जोखिम से सुरक्षा प्रदान करना :-
मानवी जीवन अनिश्चितता से भरा पड़ा है! और हर स्तर पर आर्थिक जोखिम भरी है! अस्पताल जाओ तो खर्चा, एक्सीडेंट हो गया तो खर्चा इन सब आर्थिक जोखिमों से बीमा हमें सुरक्षा प्रदान करता है!
 उस प्रकार मनुष्य के जीवन में मृत्यु एक सत्य है, मृत्यु के पश्चात परिवार का वित्तीय आधार टूट जाता है उस समय बीमा उस परिवार को आर्थिक सहायता देती है, इस प्रकार तमाम आर्थिक जोखिमों से बीमा बीमा धारक और उसके परिवार की सुरक्षा करता है!

आर्थिक जोखिम का हस्तांतरण:- 
        बीमा का मुख्य उद्देश्य यही होता है कि किसी व्यक्ति जो बीमा के लिए प्रीमियम अदा करता है उसकी सीमित आर्थिक जोखिम जो कंपनी बीमा व्यवसाय करती है उस पर हस्तांतरित करना है!  इस प्रकार व्यक्ति निर्धारित करार के अनुसार अपनी आर्थिक जोखिम की सुरक्षा करता है;

व्यापक आयाम:-
बीमा व्यवसाय दिन-ब-दिन बहुत मात्रा में बढ़ता जा रहा है और मनुष्य के जरूरत के अनुसार हर एक चीज का बीमा निकाला जा रहा है; इससे मनुष्य के भविष्य कालीन जोखिम दूर हो रहे हैं आज हम जीवन बीमा, टर्म इंश्योरेंस, स्वास्थ्य बीमा, पशुधन बीमा, फसल बीमा यहां तक चोरी का बीमा तथा आग और जलने का बीमा और हम जब बैंक में कर्जा लेते हैं तो भी बीमा निकाला जाता है इस प्रकार वर्तमान में बीमा का क्षेत्र बहुत ही व्यापक हो रहा है!

बीमा धारक व्यक्ति और कंपनी के बीच दीर्घकालीन करार:-
बीमा एक व्यक्ति और बीमा बेचने वाली कंपनी के बीच होने वाला एक दीर्घकालीन करार है! क्योंकि बीमा एक निश्चित समय के लिए निकाला जाता है; मान लीजिए हम एक 30 साल के लिए जीवन बीमा निकालते हैं तो हमें मासिक निर्धारित राशि प्रीमियम के तौर पर कंपनी को अदा करनी होगी उस बदले में हमें कंपनी 30 साल के बाद परिपक्वता राशि देंगी और साथ-साथ मृत्यु होने के पश्चात एक निर्धारित राशि देगी इसीलिए बीमा यह दीर्घकालीन और सतत चलने वाली प्रक्रिया है !

बड़ी मात्रा में बीमा धारक की संख्या और कंपनियों का विस्तार:-
आज हर एक व्यक्ति किसी ना किसी चीज का इंश्योरेंस निकालता है कभी-कभी वह शासकीय नियमों से बंधन कारक होता है, तो कोई इंश्योरेंस हम स्वेच्छा से निकालते हैं; इस वजह से आज बड़ी मात्रा में बीमा धारकों की संख्या बढ़ रही है उस वजह से बीमा कंपनियों का बहुत मात्रा में निजी व्यवसाय शुरू हुआ है!

बीमा का महत्व :-

व्यक्ति का जीवन दुर्घटना अनिश्चितता से भरा हुआ है इन सब में उसे अपने परिवार की सुरक्षा करनी होती है इसमें बीमा की अपनी एक उपयोगिता है इस वजह से बीमा एक महत्वपूर्ण वित्तीय साधन बन के उबर रहा है!

बचत और निवेश :- बीमा एक निवेश का माध्यम है और  साथ में हम इससे मासिक बचत भी कर सकते है ; मान लीजिए किसी ने जीवन बीमा 20 साल के लिए निकाला तो उसे मासिक प्रीमियम अदा करने के बदले 20 साल बाद परिपक्वता राशि बोनस एक साथ मिलेगा!


आयकर में छूट:- इंशुरंस के माध्यम से हम अपनी बचत करके आयकर अधिनियम के अंतर्गत कर में छूट पा सकते हैं ! जैसे स्वास्थ्य बीमा, जीवन बीमा इसमें हमें 80C के अंतर्गत आयकर छूट मिलती हैं !

वृद्धावस्था में मददगार :- कोई भी बीमा निकालने से हमें भविष्य में उसका फायदा होता है! मतलब जब हम वृद्धावस्था में होते हैं तब हमें उसकी परिपक्वता राशि प्राप्त होती है; और आर्थिक सहायता प्रदान करती हैं!


ऋण का एक माध्यम:- कुछ कुछ बीमा कंपनियां ऐसी होती है जो ऋण उपलब्ध कराती है; हम जो प्रीमियम जमा करते हैं उसके हिसाब से हमें ऋण मिलता है !


वैधानिक कानून :- कुछ कुछ बीमा निकालना वैधानिक कानून के अंतर्गत अनिवार्य होता है; जैसे दो पहिया चार पहिया वाहन का बीमा इत्यादि.

बीमा धारक के मृत्यु के पश्चात परिवार की सुरक्षा :- जैसे Term Insurance, जीवन बीमा इनमें हमें बीमा धारक की मृत्यु के पश्चात निर्धारित राशि नॉमिनी को मिलती है!


बीमा की मर्यादा (Limitations)


बीमा का मर्यादित स्वरूप :- कुछ हद तक बीमा का स्वरुप मर्यादित है; अगर जीवित हानी होगी तो हमें खाली वित्तीय साहायता ही मिलेगी ! 

 उच्च प्रीमियम दरें :- कुछ-कुछ बीमा में हमें प्रीमियम के लिए उच्च राशि देना पड़ता है! जैसे स्वास्थ्य बीमा में प्रीमियम की राशि ज्यादा होती है


मर्यादित जोखिमों का बीमा:-
बीमा की टर्म और कंडीशन के हिसाब से जोखिम मर्यादित होती है; और बीमा कंपनी की देयता मर्यादित होती है !

बीमा सिर्फ आर्थिक सहायता प्रदान करता है:- कोई भी जीवित हानी या गंभीर बीमारी, दुर्घटना हुई तो बीमा हमें सिर्फ आर्थिक सहाय्यता प्रदान कर सकता है !

बीमा क्षतिपूर्ति साधन ना कि लाभकारी :- जैसे जीवन बीमा हम मृत्यू के पश्चात परिवार की सुरक्षा के लिए निकलते हैं इसलिए यह क्षतिपूर्ति का साधन है !

"बीमा के विभिन्न प्रकार"

बीमा के उपयोगिता के अनुसार बीमा के विभिन्न प्रकार है और हर एक की अपनी अपनी विशेषताएं हैं!

1) जीवन बीमा:- जीवन बीमा मैं विभिन्न प्रकार आते हैं यह निर्धारित अवधि के बाद हमें परिपक्वता राशि प्रदान करता है!साथ-साथ मृत्यु के पश्चात नॉमिनी को निर्धारित राशि मिलती है!

2) स्वास्थ्य बीमा :- जैसे नाम से ही जानते हैं स्वास्थ्य बीमा स्वास्थ्य से संबंधित होता है; गंभीर बीमारी,अपघात तथा अस्पताल में होने वाले खर्चे में आर्थिक सहायता प्रदान करता है और Cashless सुविधा देता है!

विस्तृत जानकारी यहां पढ़ें:- Health Insurance

3) Vehicle Insurance:- जब भी हम कोई नया दो पहिया या चार पहिया वाहन खरीदी करते हैं तो हमें उसके साथ वाहन का बीमा निकालना अनिवार्य होता है !

4) Term Insurance:-  टर्म इंश्योरेंस एक निश्चित अवधि की  जीवन पॉलिसी है, इसमें सीमित कालावधी तक प्रीमियम का भुगतान करके निश्चिित राशि का जीवन इंश्योरेंस निकाला जा सकता है, यदि उस निश्चित समय तक  राशि कर्ता की मृत्युु हो जाए तो उसके नामांकित व्यक्तिि को बीमा की राशि दी जाती है!  साथ साथ टर्म इंश्योरेंस में आकस्मिक विकलांगता (Accidental Disability Benefit) और गंभीर बीमारी (Critical Illness) के काल में बीमा राशि उपलब्ध कराई जा सकती है! बीमा धारक के पश्चात अपनी परिवार की सुरक्षा के लिए टर्म इंश्योरेंस एक अच्छा विकल्प है!

विस्तृत जानकारी यहां पढ़ें:-Term_Insurance

इस तरह बीमा के विभिन्न प्रकार उपलब्ध है व्यक्ति की उपयोगिता के अनुसार हम विभिन्न तरह के बीमा निकालकर आर्थिक सुरक्षा कर सकते हैं!

Monday, September 21, 2020

What is IPO? HOW TO APPLY & INVEST in IPO and earn listing gain.

 IPO क्या है  और  कैसे APPLY करें

(Intial Public Offering )



आज भी बहुत से लोग शेयर मार्केट में निवेश, म्यूच्यूअल फंड इन बातों से अनजान है! जो लोग वर्तमान में शेयर मार्केट में निवेश करते हैं उनको आईपीओ क्या है उसकी समझ होगी! आज हम जानेंगे आईपीओ क्या है और इसे कैसे अप्लाई करें

क्या है इनिशियल पब्लिक ऑफर (IPO):-

किसी भी कंपनी को अपने कारोबार के विस्तार के लिए भारी मात्रा में पैसों की आवश्यकता होती है; उसके लिए कंपनी के प्रमोटर्स अलग-अलग माध्यम से निवेश इकट्ठा करते हैं! उसमें ही जब कोई गैर सूचीबद्ध कंपनी अपनी वित्तीय आवश्यकता के लिए नए शेयर जारी करने के लिए शेयर मार्केट में अपने कंपनी का नया प्रस्ताव लेकर आते हैं यानी वह अपनी कंपनी के शेयर पहली बार आम जनता के लिए प्रस्तुत करते हैं उसे ही हम इनिशियल पब्लिक ऑफर यानी आईपीओ कहते हैं !

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आईपीओ लाने का कारण:-

भविष्य के विकास के लिए कंपनी को बड़ी मात्रा में पूंजी की आवश्यकता होती है इसीलिए कंपनी जन प्रस्ताव लेकर आती है!
कंपनी को अपने विस्तार के लिए बड़ी मात्रा में ऋण या आर्थिक निवेश की आवश्यकता होती है, ऋण के माध्यम से जमा की गई राशि से कंपनी को उतना फायदा नहीं होगा, लेकिन पब्लिक इश्यू के कारण कंपनियों के विस्तार में जनभागीदारी मिलती है!
 निजी कंपनियों को अपने व्यवसाय को विस्तारित करने के लिए बड़ी मात्रा में निवेश प्राप्त होता है,
 कभी-कभी कंपनी पर बकाया डेट (debt) चुकता करने के लिए भी तथा बिजनेस बढ़ाने के लिए पब्लिक इश्यू (public issue) जारी किए जाते हैं!
कंपनी अपना आईपीओ किसी निर्धारित कीमत पर लाती है आईपीओ का लिस्टिंग होने के बाद वह कंपनी शेयर बाजार में सेबी द्वारा सूचीबद्ध की जाती है!
 
आईपीओ आवेदन करने से पहले इन बातों को जाने:-
जिस कंपनी में हम आईपीओ के लिए आवेदन कर रहे हैं उस कंपनी का हमें विस्तृत ज्ञान नहीं होगा तो आईपीओ एक जोखिम भरा निवेश बन सकता है और हमें लिस्टिंग के दिन हानि हो सकती है!
           जब भी किसी नई कंपनी को अपना आईपीओ लाना होता है तो आम जनता के लिए कंपनी के बारे में जानकारी हासिल हो उस लिहाज से कंपनी का मैनेजमेंट एक कंपनी की विवरण पुस्तिका प्रस्तुत करते हैं ! 
उसमें हम आखिर कंपनी क्या बिजनेस करती है, कंपनी के प्रमोटर कौन है, कंपनी का वार्षिक वित्तीय कारोबार कैसे होता है, लाभ और हानि क्या है, कंपनी के डायरेक्टर कौन है, मार्केट में कंपनी के प्रोडक्ट को कितनी मांग है, भविष्य में कंपनी की लाभ की स्थिति क्या हो सकती है, इन सब पहलू को जानना जरूरी होता है!

आईपीओ की क्या प्रक्रिया है:-



मार्केट में नया आईपीओ आने के साथ ही कंपनी अपना प्रोस्पेक्ट (prospect) तथा एप्लीकेशन फॉर्म (application form) ऑनलाइन जारी करते हैं! आवेदन करने के लिए किसी ब्रोकर के माध्यम से डीमैट अकाउंट द्वारा आईपीओ में आवेदन किया जाता है! कंपनी कुछ निर्धारित संख्या में शेयर जारी करते हैं, उस हिसाब से आवेदन प्राप्त शेयर संख्या ज्यादा होगी उस स्थिति में शेयरों का आवंटन लॉटरी सिस्टम से किया जाता है!
 इसमें जिन आवेदकों को शेयर जारी किए जाते हैं उनके डीमैट में शेयर जमा हो जाएगे किंतु जीने शेयर नहीं मिलते उनकी आवेदन राशि तुरंत उन्हें लौटाई जाती है !

आईपीओ में निवेश से लाभ और हानि:-



जिस कंपनी के जन प्रस्ताव के लिए हम आवेदन कर रहे हैं उस कंपनी के बारे में हमें जानकारी नहीं होगी तो आईपीओ एक जोखिम भरा निवेश बन सकता है !जिन कंपनियों की भूतकालीन आर्थिक परिस्थिति अच्छी थी और वह कंपनी दीर्घकालीन लाभ प्राप्त कर रही है, तथा कंपनी के जो मैनेजिंग डायरेक्टर होते हैं वह अगर जाने-माने होगे तो हम उस कंपनी के आईपीओ में आवेदन करके या निवेश करके अच्छा लाभ प्राप्त कर सकते हैं;
ऐसा नहीं है कि हम आईपीओ में आवेदन करके हर बार लाभ प्राप्त ही करें कभी-कभी कंपनी के बारे में कम जानकारी और असक्षम वित्तीय कारोबार से हमें लिस्टिंग के वक्त और आगे चलकर हानि हो सकती है इसलिए सतर्क रहे और निवेश से पहले किसी सलाहकार की राय अवश्य लें!

आईपीओ (IPO) को आवेदन करने की विधि :-(ब्रोकर के माध्यम से और ऑनलाइन बैंकिंग से):-

जिस ब्रोकरेज कंपनी में हमारा डिमैट अकाउंट है उसके टर्मिनल से हम किसी भी आईपीओ में आवेदन कर सकते हैं उसके लिए सबसे पहले हमें ब्रोकर के टर्मिनल पर जाकर अपना यूजर आईडी और पासवर्ड दर्ज करना होगा!
 हम अभी एंजेल ब्रोकिंग का उदाहरण देखेंगे
Step to apply IPO in Angel Broking mobile Application:-
1) यूजर नेम और पासवर्ड डाल के लॉगिन करें
2) ☰ लॉग इन होने के बाद इस तरह 3 लाइनें☰ दिखेगी उस पर टच करें उसके बाद ट्रेड(trade) में जाए, ट्रेड में आपको आईपीओ (IPO) नाम का Menu दिखेगा उसे टच कीजिए, उसके बाद आपको उपलब्ध आईपीओ लिस्ट दिखेगी उस पर अप्लाई कीजिए और इंटरनेट बैंकिंग या यूपीआई के माध्यम से पेमेंट कीजिए,

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Thursday, September 17, 2020

Term insurance, what is term insurance & which term insurance company is best

 "Term Insurance"

टर्म इंश्योरेंस (बीमा) क्या है ?


आपने भी इंश्योरेंस INSURANCE या बीमा नाम का शब्द कभी ना कभी सुना ही होगा, कहीं तरह के इंश्योरेंस होते हैं, जैसे जीवन बीमा LIFE INSURANCE, HEALTH INSURANCE, VEHICLE INSURANCE व्हीकल इंश्योरेंस उसी तरह टर्म इंश्योरेंस TERM INSURANCE जीवन से संबंधित एक महत्वपूर्ण बीमा पॉलिसी है! तो आज हम जानेंगे आखिर टर्म इंश्योरेंस क्या है और यह क्यों निकालना जरूरी है !


क्या है टर्म इंश्योरेंस (Term insurance) :- 

(Term Insurance) टर्म इंश्योरेंस एक निश्चित अवधि की  जीवन पॉलिसी है, इसमें सीमित कालावधी तक प्रीमियम का भुगतान करके निश्चिित राशि का जीवन इंश्योरेंस निकाला जा सकता है, यदि उस निश्चित समय तक  राशि कर्ता की मृत्युु हो जाए तो उसके नामांकित व्यक्तिि को बीमा की राशि दी जाती है!  साथ साथ टर्म इंश्योरेंस में आकस्मिक विकलांगता (Accidental Disability Benefit) और गंभीर बीमारी (Critical Illness) के काल में बीमा राशि उपलब्ध कराई जा सकती है! बीमा कर्ता के पश्चात  अपनी परिवार की सुरक्षा के लिए टर्म इंश्योरेंस एक अच्छा विकल्प है!


टर्म इंश्योरेंस खरीदे या नहीं (Buy or Not):- 

क्या आप भी अपने मृत्यु के पश्चात अपने परिवार की सुरक्षा करना चाहते हैं तो टर्म इंश्योरेंस एक बेहतरीन बीमा सुरक्षा है! कम प्रीमियम पर हम अपने परिवार की सुरक्षा कर सकते हैं!             कोई भी मासिक वेतन भोगी व्यक्ति यह बीमा पॉलिसी चालू करा सकता है, जितना कम उम्र में आप पॉलिसी खरीदेगे उतना कम प्रीमियम आपको लगेगा, टर्म इंश्योरेंस का आयकर बेनिफिट भी है इसीलिए वित्तीय सलाहकार की राय लेकर इसे जरूर खरीदा जा सकताा है !


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टर्म इंश्योरेंस के लाभ और हानि:- 

आज हम जानेंगे आखिर क्या है टर्म इंश्योरेंस के लाभ और क्या हानि हो सकती है !

◆) तो सबसे पहले  इंश्योरेंस निकालने से हम अपने मृत्यु के पश्चात अपने परिवार की सुरक्षा कर सकते हैं!

◆) आयकर अधिनियम के तहत प्रीमियम की राशि पर बीमा कर्ता को कर लाभ मिलता है!

 ◆) टर्म इंश्योरेंस की प्रीमियम राशि बहुत ही कम उम्र के हिसाब से होती है इसीलिए जितना कम उम्र में 21 साल के ऊपर निकाल लोगे उतना कम प्रीमियम लगेगा!

◆) मृत्यु लाभ के अलावा बीमा कर्ता को आकस्मिक विकलांगता और गंभीर बीमारी के काल में बीमा राशि मिलती है!

◆) बीमा खरीदते वक्त अगर आपने परिपक्वता कालावधी लाभ चुना होगा तो आपने जो प्रीमियम अदा किया है वह बीमा कालावधी पूरा होने के बाद आपको प्रीमियम की पूरी राशि मिलती है , इस प्रकार टर्म इंश्योरेंस के अनेक फायदे हैं!


हानि

◆) बीमा का टर्म खत्म होने से पहले अगर बीमा धारक की मृत्यु नहीं होती है तो बीमा का प्रीमियम आपको नहीं मिलेगा अभी कुछ कुछ कंपनियां परिपक्वता कालावधी का प्रीमियम की राशि अदा करने का विकल्प देती है,

◆) साथ में मृत्यु के पश्चात आपको कागदी कार्रवाई करने में थोड़ी सी दिक्कत हो सकती है!

भारत की कार्यरत टर्म इंश्योरेंस कंपनियां:-  

1.ICICI Prudential insurance
2. HDFC Life term insurance 
3. Max Life term insurance 
4. Tata AIA 
5.bajaj allianz 
6. PNB MetLife 
7. Kotak Life Insurance 
8. Aditya Birla capital 
9. Reliance Nippon insurance 
10. SBI Life 
11. LIC Term insurance

टर्म इंश्योरेंस लेने से पहले इन बातों का ध्यान रखें:-

भारत में जितनी टर्म इंश्योरेंस की कंपनियां है उनसे एक दूसरे से इंश्योरेंस पॉलिसी से लेकर बातें कंपेयर करें, 

किसी भी इंश्योरेंस कंपनी का क्लेम सेटेलमेंट रेशों (claim settlement ratio) क्या है यह देखें, जिस कंपनी का क्लेम सेटेलमेंट 98% के ऊपर है वह अच्छी कंपनी है ! 

साथ साथ कंपनी कितने बड़े अमाउंट (amount) का क्लेम सेटलमेंट कर सकती है यह भी देखें !

उसके बाद हमें देखना है कि रिजेक्शन रेशों (Rejection ratio) क्या है जिस कंपनी का रिजेक्शन ज्यादा है इस कंपनी में आप बिल्कुल बीमा मत निकालो,

कम प्रीमियम के चक्कर में ना पड़े क्योंकि वह आपको ज्यादा बेनिफिट नहीं मिलेंगे और इंश्योरेंस के साथ बाकी आकस्मिक विकलांगता और गंभीर बीमारी जैसे राइडर कंपनी दे रही कि नहीं देखें,

इन सब बातों को ध्यान में रखकर आप अपने परिवार की सुरक्षा के लिए कोई अच्छा सा टर्म इंश्योरेंस प्लान खरीद सकते हैं






What is health insurance and how to buy policy

What is health insurance

"स्वास्थ्य बीमा (health insurance) क्या है"



आज हम ऐसे टॉपिक पर बात करने जा रहे जो नाम तो सुना है लेकिन बहुत से लोग जिन्हें पता ही नहीं यह हेल्थ इंश्योरेंस (health insurance) क्या होता है और किस तरह से काम में आता है!
 खासकर हमारे ग्रामीण इलाकों में इस बारे में बहुत कम जानकारी है!
 तो आज उसी से संबंधित जानकारी हासिल करेंगे,
जैसा कि आप सब जानते ही हैं पल भर में कुछ भी हो सकता है, वक्त वक्त की बात है कब क्या हो सकता है कोई भी बता नहीं सकता ना कोई अंदाजा लगा सकता है! मनुष्य एक खुद में मूल्यवान संपत्ति है उसे सुरक्षित तो रखना ही होगा, इसीलिए तो कहते हैं जान है तो जहान है!
वर्तमान में आप देखी रहे होंगे कोविड-19 (Covid-19) महामारी ने  किस तरह से लोगों के जन जीवन में खलल निर्माण किया! इसीलिए इन सब स्वास्थ्य संबंधित बीमारियों से बचने के लिए तथा अपने परिवार की सुरक्षा करने के लिए हेल्थ इंश्योरेंस की आज बहुत आवश्यकता महसूस होती है!

क्या होता है स्वास्थ्य बीमा health insurance:-

स्वास्थ्य बीमा एक पॉलिसी (policy) है जो इंश्योरेंस कंपनी आपके देय प्रीमियम के बदले आपको चिकित्सा सुविधा कैशलेस (cashless) तरीके से उपलब्ध कराती है!
 कुछ मासिक प्रीमियम भर के आप अस्पताल में भर्ती होने से लेकर सभी चिकित्सा खर्च तथा मेडिसिन खर्च इंश्योरेंस कंपनी से आप को दिया जाता है!

क्या होता है प्रीमियम और इंश्योरेंस कवरेज (primium & insurance coverage):-

किसी भी स्वास्थ्य बीमा की पॉलिसी निकालने के लिए आपको कंपनी को मासिक एक निर्धारित रकम देय होती है, उसे ही हम प्रीमियम कहते हैं जो कंपनी को अदा करना पड़ता है! उस बदले में कंपनी हमें एक निर्धारित रकम की कैशलेस स्वास्थ्य चिकित्सा देती है उसे ही हम इंश्योरेंस का कवरेज करते हैं!

क्या हेल्थ इंश्योरेंस निकालना जरूरी है:- 

मनुष्य के दैनिक जिंदगी में एक समय ऐसा आता है कि उसे अस्पताल जाने की जरूरत पड़ती है! 
 बदलती जीवन शैली, प्रदूषण, मानसिक तनाव इत्यादि कारणवश मनुष्य के स्वास्थ्य पर विपरीत परिणाम होता है, और इससे स्वास्थ्य की हानी होती है! तब हमें अस्पताल और चिकित्सा की जरूरत रहती है तब चिकित्सा के लिए हमारी सालों की जमा पूंजी चली जा सकती है! इसीलिए तब हेल्थ इंश्योरेंस काम में आ सकता है!
 कुछ मासिक प्रीमियम देखें हम अपने स्वास्थ्य का कवरेज ले सकते हैं;
भविष्य में होने वाली स्वास्थ्य संबंधित अनिश्चितता और गंभीर आजार इनकी चिकित्सा करने के लिए हमें बहुत मात्रा में पैसों की जरूरत पड़ती है उससे हमारी जमा पूंजी चली जा सकती है; इसीलिए अगर हमारे पास हेल्थ इंश्योरेंस होगा तो हमें उतनी वित्तीय हानि नहीं होगी और साथ में हम अपनी और अपने परिवार की चिकित्सा अच्छे से अच्छे तरीके से कर सकते हैं !

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हेल्थ इंश्योरेंस के फायदे:- 



एक हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी हमारी और हमारे परिवार की स्वास्थ्य संबंधित सुरक्षा प्रणाली है!
 हर एक पॉलिसी के अपने अलग-अलग फायदे हैं तो हम आज जानते हैं कौन-कौन से फायदे हेल्थ इंश्योरेंस निकालने से होंगे !
1) स्वास्थ्य संबंधित सहायता:-
हमें कभी भी स्वास्थ्य संबंधित दुर्घटना का सामना करना पड़ सकता है तथा भविष्य में गंभीर आजार हो सकता है उस समय हेल्थ इंश्योरेंस सहायता करेगा!

2) जमा पूंजी की बचत :- 
हेल्थ इंश्योरेंस निकालने से जो कुछ चिकित्सा के लिए वित्तीय खर्चा आएगा वह नहीं लगेगा, उससे हमारी जमा पूंजी की बचत होगी!

3) Cashless treatment:- हेल्थ इंश्योरेंस कैशलैस ट्रीटमेंट अपने बीमा धारक को देता है !

4) Income tax benefit:- हेल्थ इंश्योरेंस का एक फायदा ए भी है हमें आयकर अधिनियम के तहत टैक्स में छूट मिलती है

स्वास्थ्य बीमा कैसे चुने और दावा करने की प्रक्रिया (claim process):- 

सबसे पहले स्वास्थ्य बीमा खुद के लिए और अपने परिवार के लिए लेना है क्या यह देखें, उसके बाद 3-4 बीमा कंपनियों के पॉलिसियों को कंपेयर करें, साथ में हमें कितने रुपए का कवरेज लेना है इस बात का भी ध्यान रखें!
 कोई भी बीमा कंपनी चुनने से पहले उस कंपनी का  claim settlement ratio कितना है देखें, अच्छी कंपनियों का ratio 97% के ऊपर ही होता है! पॉलिसी के अंतर्गत कौन-कौन से कवरेज शामिल है देखें -जैसे दैनिक स्वास्थ्य जांच, मातृत्व, एंबुलेंस, मेडिसिन चार्ज  इत्यादि;
 पॉलिसी में नो क्लेम बोनस है कि नहीं देखें! बीमा कंपनी कितने समय में दावे की प्रक्रिया करती है देखें साथ में मुख्य बात उस बीमा कंपनी से कितने अस्पताल जुड़े हैं और हमारे क्षेत्र में वह अस्पताल है कि नहीं देखें, इन बातों को ध्यान में रखते हुए पॉलिसी का चयन करें!

Claim process:- कैशलेस तरीके से उपचार करने के लिए हमें सबसे पहले अपने इंश्योरेंस कंपनी से संपर्क करना पड़ेगा, क्योंकि इंश्योरेंस कंपनी उनके साथ जुड़े अस्पताल से डायरेक्ट भुगतान करते हैं;
 तो सबसे पहले हमें कंपनी के प्रतिनिधि को बीमा धारक का नाम, पॉलिसी नंबर, अस्पताल में भर्ती करने का date और time तथा जगह बताना होगा, साथ में बीमारी की प्रकृति बतानी होगी! बाद में दावे का रजिस्ट्रेशन किया जाएगा! इस तरह से क्लेम प्रोसेसिंग होती है;

इस तरह से हमने आज जाना की स्वास्थ्य बीमा क्या होता है! आशा करता हूं आपको अब समझ आया होगा और भविष्य में जरूर काम में आएगा धन्यवाद!!


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Wednesday, September 16, 2020

What is mutual fund and how to invest in mutual fund ( म्यूच्यूअल फंड क्या है)

"What is mutual fund and how to invest in mutual fund"

म्यूच्यूअल फंड क्या है और कैसे इन्वेस्ट करें ?


हर किसी व्यक्ति को शेयर बाजार में पैसा लगाकर उसे बढ़ाने की चाहत होती है, लेकिन शेयर बाजार का कम ज्ञान और समय की कमतरता के वजह से वह अपना पैसा यहां लगाने से डरता है !

इसीलिए निवेशक को कम जोखिम लेकर पैसा लगाने के लिए म्यूच्यूअल फंड (MUTUAL FUND) एक ऑप्शन है !

म्यूच्यूअल फंड (MUTUAL FUND)एक ऐसा माध्यम है जिसमें बहुत से निवेशकों का पैसा एक साथ जमा करके वह कोई भी कंपनी की  asset management company (AMC)   और उनके मैनेजर मिलकर निवेशक का पैसा शेयर बाजार में लगाते हैं! यह सेबी द्वारा रजिस्टर कॉरपोरेट संस्था होती है ! म्यूचल फंड मैनेजर दीर्घकालीन अनुभव और बाजार की रणनीति से अच्छे वाकिफ होते हैं इसीलिए म्यूचल फंड में रिस्क थोड़ा सा कम हो जाता है! इसीलिए कम जोखिम वाले निवेशकों के लिए म्यूच्यूअल फंड एक अच्छा विकल्प है! इसी कारणवश वर्तमान में भारत में म्यूचुअल फंड में बहुत मात्रा में निवेशकों का पैसा यहां इन्वेस्ट करने के लिए आ रहा है!

Mutual fund किस तरह से कार्य करता है

:- जब निवेशक अपना पैसा म्यूचुअल फंड में लगाता है तब म्यूचल फंड मैनेजर वह पैसा शेयर मार्केट में इनवेस्ट करता है, या अन्य सिक्योरिटी में डालताा है ! फंड किस तरह से है उस हिसाब से फंड मैनेजर अलग-अलग सिक्योरिटी में निवेशकों का पैसा लगाता है, फंड में इक्विटी फंड, डेट फंड, बैलेंस फंड ऐसे प्रकार आते हैं!
उसके बाद जिस किसी सिक्योरिटी में पैसा लगाया है उस पर लाभ प्राप्त होता है वह लाभ फंड मैनेजर कुछ एक्सपेंस काटकर निवेशकों में समान भाग में वितरित करता है, इस तरह निवेशक  को लाभ प्राप्त होता है!

Mutual fund मैं क्यों Investment करें :- 

म्यूच्यूअल फंड के अपनेे आप में शेयर बाजार केे उतार-चढ़ाव में रिस्क् कम करनेे के साथ साथ अन्य भी फायदेे निम्नवत है !

Diversification ( विविधता):- छोटे निवेशक अपना कम पैसा भी या लगा सकते हैं जो कि शेयर बाजार में लगाएंगे तो एक ही share में चला जाएगा, लेकिन मान लीजिए आपने किसी फंड में ₹5000 का निवेश किया तो फंड मैनेजर वह पैसा 50 अन्य कंपनियों में लगाएगा क्योंकि बाजार में भारी उतार-चढ़ाव होता है इससे हानी की संभावनाएं कम होगी और अंततः आपको औसतन अच्छा मुनाफा मिलेगा! 

निवेश का आसान तरीका :- आप ऑनलाइन सुविधा के माध्यम से किसी भी फंड में निवेश कर सकते हैं और इसमें जोखिम भी कम है! साथ साथ किया हुआ निवेश कभी भी आप घर बैठे निकाल सकते हैं आपको ना बैंक जाने की जरूरत ना कोई संस्था में जाने की जरूरत है यह सुविधा 24×7 उपलब्ध रहती है!

अनुभवी प्रबंधन:- कोई भी फंड का प्रबंधन सालों से अनुभव प्राप्त होता है साथ-साथ उन्हें बाजार के उतार-चढ़ाव का अच्छा अनुभव प्राप्त होता है और कंपनी के फंडामेंटल का अच्छा ज्ञान रहता है और भविष्य में कौन सी कंपनी को अच्छा मुनाफा हो सकता है इसका वह पूर्वानुमान लगा सकते हैं, इसीलिए म्यूच्यूअल फंड शेयर की तुलना में कम रिस्क का अच्छा निवेश माना जाता है!

पारदर्शिता:- चुकी म्यूच्यूअल फंड संस्था सेबी रजिस्टर्ड होती है इस वजह से कोई भी फंड को अपना (NAV) नेट ऐसेट वैल्यू रोजाना दिखाना पड़ता है, उन्हें मासिक पोर्टफोलियो का अपडेट निवेशकों को देना पड़ता है तथा फंड अपने अन्य खर्चों की जानकारी या फंड में बदलाव की जानकारी निवेशकों को उपलब्ध कराता है!

Step by step guide how to investing process ( निवेश की प्रक्रिया):- 

कोई भी नया निवेशक किसी भी फंड के साइट पर जाकर म्यूचल फंड के लिए रजिस्ट्रेशन कर सकता है लेकिन उसे सेबी द्वारा मैंडेट केवाईसी (KYC) यानी KNOW YOUR CUSTOMER करना जरूरी है! केवाईसी सेबी के रजिस्टर्ड हाउस, डिस्ट्रीब्यूटर फंड हाउस डिस्ट्रीब्यूटर तथा रजिस्टर्ड केवाईसी एजेंसियों के माध्यम से वन टाइम केवाईसी करना जरूरी है!
 उसके बाद आप बिना कोई रुकावट के फंड में निवेश कर सकते हैं !
     ऑफलाइन केवाईसी करने के लिए एक केवाईसी फॉर्म होता है उस पर की डिटेल्स भरिए साथ में एक खुद का फोटो और ऐड्रेस प्रूफ पहचान पत्र तथा पैन कार्ड के साथ रजिस्टर्ड फंड हाउस या केवाईसी सेंटर से केवाईसी कर सकते हैं;

अभी आप म्यूच्यूअल फंड में निवेश करने के लिए फंड के साइट पर जाकर रजिस्टर करें उसमें अपना वयक्तिक जानकारी दर्ज करें तथा नॉमिनी की जानकारी दें उसके बाद आपको जो फंड में अपना पैसा निवेश करना है वह फंड चुने और अपने बैंक अकाउंट की डिटेल्स वहां दर्ज करें उसके बाद अंतिम में पेमेंट कीजिए folio create होने के बाद आपको एक folio ID मिलेगा उस के माध्यम से आप लॉगिन करके अपना पोर्टफोलियो कभी भी चेक कर सकते हैं 

म्यूचुअल फंड में निवेश के तरीके 

म्यूचुअल फंड में 2 तरीके से निवेश कर सकते हैं ; एक तो एकमुश्त राशि (Lumsum Amount) फंड में लगा दे या हम मासिक सीप (SIP) चालू करें!

एकमुश्त निवेश क्या है?
(LUMSUM INVESTMENT):-

एकमुश्त निवेश (lumsum) किसी भी म्यूचल फंड (mutual fund) में एक ही बार निवेश करके उसे कुछ कालावधी के लिए उसे छोड़ देना है! आपके पास एक बड़ी रकम होगी तो आप एक साथ इसमें निवेश कर सकते हैं; अगर मार्केट दिन-ब-दिन बढ़ेगा तो आपके निवेश की वैल्यू भी बढ़ जाएगी!

Systematic Investment plan (SIP) सिप :- 

सीप (SIP) निवेश का वह तरीका है जिसमें कोई भी निवेशक म्यूचुअल फंड में हर माह कुछ रकम लगाता है! इसमें कोई भी निवेशक छोटी सी राशि में भी निवेश कर सकता है, और बाजार के उतार-चढ़ाव में सीप अच्छा प्रदर्शन करता है और अंतिम ता औसतन अच्छा मुनाफा मिलता है !

नेट ऐसेट वैल्यू (N.A.V.):-

NAV नेट ऐसेट वैल्यू किसी फंड की वह कीमत है जिस पर हम कोई भी फंड खरीद सकते हैं; फंड खरीदना यानी फंड के यूनिट खरीदना है !यूनिट वह मात्रा है जो हमें फंड से प्राप्त होती है; मान लीजिए किसी फंड का एनएवी (NAV) ₹10 है और उसमें हमने ₹1000 का निवेश किया तो हमें उस फंड में 100 यूनिट प्राप्त होंगे ! NAV की वैल्यू दिन-ब-दिन कम या ज्यादा हो सकती है उसमें बाजार के उतार-चढ़ाव का प्रभाव होता है!


( जानकारी पसंद आई तो अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करें )

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